अपठित गद्यांश/ हिंदी /कक्षा 10/ सीबीएसई

 अपठित गद्यांश का अर्थ:-

गद्ध का ऐसा अंश जिसका  पहले अध्ययन नहीं किया गया हो वह ,'अपठित गद्यांश' कहलाता है ।

प्राय अपठित गद्यांश के अंतर्गत किसी विषय को समझने, भाषा और शैली के बीच के संबंधों को खोजने तथा विद्यार्थियों की अद्भुत क्षमता को परखना होता है। अपठित गद्यांश के अंतर्गत विद्यार्थियों को भावार्थ को समझते हुए उसका सावधानीपूर्वक, गंभीरता वह गहनता से अध्ययन करना अत्यंत आवश्यक है।

  अपठित गद्यांश को हल करने के चरणबद्ध तरीके:-

1. सर्वप्रथम दिए गए अपठित गद्यांश को दो-तीन बार ध्यानपूर्वक पढ़कर उसके मूल भाव को आत्मसात करना चाहिए।

2. गद्यांश में दी गई महत्वपूर्ण सूचनाओं को रेखांकित करते रहना चाहिए इससे विषय- वस्तु वह पठन कौशल वाले प्रश्नों को हल करने में आसानी होती है।

3. भाषिक संरचना एवं व्याकरण संबंधी प्रश्नों के लिए गद्यांश में दिए गए कठिन शब्दों ,मुहावरों आदि को रेखांकित करना चाहिए।

4. शीर्षक संबंधी प्रश्न पर विशेष ध्यान देना चाहिए तथा पूरे गद्यांश को पढ़ने व समझने के पश्चात ही उसका शीर्षक लिखना चाहिए।

5. सभी प्रश्नों को ध्यान पूर्वक पढ़ने व समझने के पश्चात ही उनका उत्तर लिखना प्रारंभ करना चाहिए।

6. लघु उत्तरीय एवं अति लघु उत्तरीय प्रश्नों के उत्तर निर्धारित अंक सीमा के अनुसार देने चाहिए।

7. अंत में विद्यार्थी द्वारा एक बार सभी प्रश्नों के उत्तर को पुण्य ध्यानपूर्वक पढ़कर जांच लेना चाहिए।

सैंपल गद्यांश ( हल सहित )

1. लोकतंत्र के मूलभूत तत्व को समझा ही नहीं गया है इसलिए लोग समझते हैं कि सब कछ सरकार कर देगी, हमारी कोई जिम्मेदारी नहीं है। लोगों में अपनी पहल से जिम्मेदारी उठाने और निभाने का संस्कार विकसित नहीं हो पाया है। फलस्वरूप देश की विशाल मानव शक्ति अभी खर्राटे लेती पड़ी है और देश की पूंजी उपयोगी बनाने के बदले आज भोज रूप बन बैठी है लेकिन ,उसे नींद से झकझोर कर जागृत करना है। लेकिन अभी तक हमारे देश के नागरिक अपनी जिम्मेदारी से बचते रहे हैं। चाहे सड़क पर चलने की बात हो अथवा साफ-सफाई की बात हो , जहां जहां हम लोगों को गंदगी फैलाते और बेतरतीब ढंग से वाहन चलाते देख सकते हैं फिर चाहते हैं कि सबकुछ सरकार ठीक कर दे। सरकार ने बहुत सारे कार्य किए हैं । इसे अस्वीकार नहीं किया जा सकता है- वैज्ञानिक प्रयोगशाला खोली है, विशाल बांध बनवाए हैं , फौलाद के कारखाने खोले हैं आदि-आदि बहुत सारे काम सरकार के द्वारा हुए हैं,  पर अभी करोड़ों लोगों को कार्य में प्रेरित नहीं किया जा सकता है। 

वास्तव में होना तो यह चाहिए कि लोग अपनी सूझबूझ के साथ अपनी आंतरिक शक्ति के बल पर खड़े हो और अपने पास जो कुछ साधन सामग्री हो उसे लेकर कुछ करना शुरू कर दें और फिर सरकार उसमें आवश्यक मदद करें। उदाहरण के लिए गांव वाले बड़ी-बड़ी पंचवर्षीय योजनाएं नहीं समझ सकेंगे , पर वे लोग यह बात जरूर समझ सकेंगे कि अपने गांव में कहां कुआं चाहिए कहां सिंचाई की जरूरत है कहां पुल की आवश्यकता है। बाहर के लोग इन सब बातों से अनभिज्ञ होते हैं।

1. लोकतंत्र का मूलभूत तत्व क्या है? यह अभी पूर्णत असफल क्यों नहीं हो पाया है?

उत्तर- लोकतंत्र का अर्थ है-' लोगों का राज्य' और इसका मूलभूत तत्व कर्तव्य पालन है । जबकि लोग समझते हैं कि उनकी सभी आवश्यकताओं की पूर्ति के जिम्मेदार सरकार की है। लोगों की इन्हीं मानसिकता के कारण लोकतंत्र अभी तक पूर्णत सफल नहीं हो पाया है।

2. किसी भी देश को महान कौन बनाते हैं ?

उत्तर- किसी भी देश को महान बनाने का कार्य वहां के नागरिकों के द्वारा अपने कर्तव्य का पालन करके,  देश के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझकर उसके अनुरूप कार्य करने के द्वारा होता है। 

3. गद्यांश में सरकार के कामों के विषय में क्या क्या कहा गया है ?

उत्तर- गद्यांश में सरकार के कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि सरकार ने वैज्ञानिक प्रयोगशाला खुलवाए ,हैं देश में विशाल बांध बनवाई है, विभिन्न कारखाने खुलवा है आदि ऐसे अनेक देश हित के कार्य किए हैं।

4. प्रस्तुत पद्यांश में राष्ट्र के नागरिकों को सरकार को लेखक द्वारा क्या सुझाव दिया गया है ?

उत्तर- गद्यांश में लिखा कि यह सुझाव देते हैं कि लोग अपने समाज व आंतरिक उर्जा को आधार बनाकर खड़े हो और स्वंय के समक्ष जो भी साधन व सामग्री उपलब्ध है , उनके आधार पर कुछ कार्य आरंभ करना चाहिए और साथ ही साथ सरकार द्वारा भी उनकी सहायता अवश्य की जानी चाहिए।

5. गद्यांश में लेखक ने सरकारी व्यवस्था की किस कमी को उजागर किया ?

उत्तर- गद्यांश में सरकार द्वारा गांव से जुड़ी समस्याओं के निदान में ग्रामीणों की भूमिका को नकारने की समस्या को उजागर किया गया है।


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