कुषाण राज्य की मुख्य विशेषताएं
कुषाण काल के संबंध में कुषाण मुद्रा और पूरालेखो की भौगोलिक स्तर पर फैलाव तथा मध्य एशिया से वाराणसी के विभिन्न स्थानों से मिली कुषाण काल से संबंधित खुदाई में प्राप्त परतो जो पुरातत्वीय दृष्टिकोण से बहुत समृद्ध है से पता चलता है कि यह एक अत्यंत ही सुसंगठित तथा केंद्रीकृत राज्य था। लेकिन इस संबंध में प्रशासन संबंधी जो जानकारी प्राप्त हुई है वह पर्याप्त नहीं है ।माना जाता है कि मौयो जैसे उनका राजनीतिक संगठन केंद्रीकृत राज्नय हीं था। सिर्फ पूरालेख और मुद्राओं से किसी एक शक्तिशाली और विशाल प्रशासन तंत्र के अस्तित्व का संकेत नहीं मिलता है लेकिन इतना अवश्य है कि इस काल में शासकों द्वारा अतिथि पूर्व उपाध्याय द्वारा की गई जैसे महाराज धीराज देवपुत्र इत्यादि देसी उपाध्याय धारण करने के लिए साक्ष्य उपलब्ध है मुद्रा लेखों पर कनिष्कर उसके उत्तरा अधिकारियों के द्वारा अपने नामों के आगे सोना नो भाव उपाधि लगाते थे इसके अतिरिक्त कैसर या कैसर आउट नामों का भी इस्तेमाल किया जाता था जैसे कि मथुरा एक अभिलेख में कनिष्क ने शव को वहां राजदीराज देवपुत्र सहायक के रूप में प्रस्तुत किया है एक तरफ कुशा...