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Showing posts from October, 2023

Class 12 history

 भारत में ब्रिटिश शासन के दौरान आदिवासी एवं दलित संप्रदायों के आंदोलन का विवरण दीजिए! Ans:- भारत में औपनिवेशिक  शासन काल में सबसे खराब अवस्था आदिवासियों और दलितों की थी ।ब्रिटिश सरकार एवं मध्यम वर्गीय समाज एवं महाजनों के शोषण के अतिरिक्त समाज के उच्च वर्ग का प्रत्येक व्यक्ति इन्हें दृष्टि से देखा था। निम्न वर्गों में संथाल, कोल ,मुंडा आदि लोग ने सरकार जमींदार और महाजनों के शोषण के विरुद्ध में आंदोलन किया ।बाद के काल में आर्थिक शोषण एवं सामाजिक अत्याचार के विरुद्ध दलित ने भी प्रतिरोध करना शुरू किया। परिजन मेहर आदि जाति के दलितों ने डॉक्टर भीमराव अंबेडकर के नेतृत्व में आंदोलन किया बंगाल में दलितों ने आंदोलन चलाया उसमें नमः शुद्र, राजवंशी आदि आते थे।        आदिवासियों के जीवन पर औपनिवेशिक प्रभाव अपनी बेसिक नीति ने उनके जीवन को बहुत प्रभावित किया जिसका वर्णन निम्नलिखित है :- *प्रशासनिक सुधार के अंतर्गत ब्रिटिश सरकार ने आदिवासियों में घुसपैठ की ।सरकार ने उनके हाथ से वन भूमि का अधिकार छीनकर उनको प्रभावित किया। * ब्रिटिश सरकार ने वनों के स्वामित्व और उनके उपयोग के...
1)   चीन में 4 में आंदोलन के नेतृत्व के कर्म का विश्लेषण कीजिए तथा इस आंदोलन के महत्व की चर्चा कीजिए उतर:-  चीन के चार मई का आंदोलन:- सन 1912 से 20 के बीच का समय चीनी इतिहास का आंतरिक संघर्ष और सुधार का काल माना जाता है।* प्रथम विश्व युद्ध में चीन मित्र देशों के साथ रहा तेरी शांति सम्मेलन के चीन की उचित और अन्य संगत प्रदेशों की मांग को अनसुना कर दिया गया। पेरिस शांति सम्मेलन में चीन की उचित और अन्य संगत प्रदेशों की मांग को अनसुना कर दिया गया और चीन के शासको ने इन अन्याय के विरुद्ध आवाज भी नहीं उठाई लेकिन चीन की जनता ने इस देश का अपमान समझा और वर्तमान चीनी शासन और उसके निर्णय के विरुद्ध 4 में 1919 को चीन की राजधानी पेंकिग में छात्रों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया ।यह विरोध धीरे-धीरे शंघाई कैंटीन आदि अन्य नगरों तक फैल गया ।इस आंदोलन में मध्यवर्ग मजदूर किसान बुद्धिजीवी वर्ग एवं राष्ट्रवादियों ने खुलकर भाग लिया चीन के कोने-कोने से विदेशी शक्तियों का बहिष्कार किया गया इस तरह इस आंदोलन के स्वरूप को निम्न रूपों में देखा जा सकता है। * 4 में आंदोलन एक राष्ट्रीय आंदोलन था जो विदेश...

The proposal

Lomov came with a proposal to marry Natalya. What logic does he give her his decision? Ans :- Lomov came to chubukov's house with a proposal to marry his daughter's Natyala. To support his decision he give the logic that he is already 35 and age it which one should get married .At this age if he waits for an ideal or real love he would probably never get married .secondly, he explains to himself that is in excellent housekeeper , well educated and not bad looking -the qualities which are needed to be a good wife.  And lastly Lomov gives the logic that since he always  suffer  with palpitations  is excitable and always gets upset ,he ought to lead a quite and regular life and consequently get married. 2) "I am the must unhappy of man".:-  Who said this? why did he say so? how did the speaker get rid of his unhappanish? Ans :- This line was said by chubukov.           He said so because hethought that  Lomov was dead. Lomov ...

"समय के देर पर " कक्षा 12

 "समय के ढेर पर" शीर्षक कविता का सारांश लिखिए।                    अथवा "समय के ढेर पर "कविता का मूल भाव अपने शब्दों में लिखिए उतर :-" समय के ढेर पर" कविता" साक्षी रहे वर्तमान" शीर्षक काव्य संग्रह से ली गई है जिसके कई गिरजा कुमार माथुर जी हैं। प्रस्तुत कविता द्वितीय विश्व युद्ध की परिस्थितियों की बात की लिखी हुई कविता है युद्ध की विशेषताओं के कारण मानव का मूल्य का विघटन ,सामाजिक विषमताओं का क्षय,  अकेलापन ,कुंठा ,जीवन में कुछ ना कर पाने की असमर्थता आदि निराशा के स्वर व्याप्त दिखाई पड़ता है ।'समय के ढेर पर' कविता अस्तित्ववाद से क्षणवाद जीवन दर्शन को अंगीकार करता है। घड़ी की सुइयों को प्रतीक बनाकर अपने व्यर्थ होते समय को देखकर कभी व्याकुल हो रहा है ।कवि का भय और कुंठा इतनी बढ़ गई है कि उसे घड़ी की आवाज से डर लगता है। कवि कहता है कि मैं अपने निष्क्रियता और शिथिलता  के कारण अपने जीवन के कुछ वर्ष गंवा दिए लेकिन अब इसके अंदर जिजीविषा  जागृत हो चुकी है ।वह अपने उसे परिवेश से लड़ने की कोशिश कर रहा है और कुछ हद तक वह अपने इस का...

अवकाशवाली सभ्यता कक्षा 12

 अवकाश वाली सभ्यता में कवि ने किन-किन भाव को व्यक्त किया है अथवा  अवकाश वाली सभ्यता कविता का मूल भाव अपने शब्दों में लिखिए उतर:-अवकाशवाली सभ्यता छायावादी कवि रामधारी सिंह दिनकर जी के द्वारा लिखित कविता है। युद्ध के बाद या युद्ध के दौरान शांति की समस्या से वह भी पीड़ित थे ।प्रस्तुत कविता दिनकर जी के द्वारा युद्ध और शांति की समस्या से प्रेरित होकर लिखिए एक रचना है। *कवि ने मनुष्य के द्वारा जरूरत के नाम पर किए गए अनेक आविष्कार किया ।उस आविष्कार का मनुष्य के जीवन पर क्या प्रभाव पड़ता है या आने वाला समय पर क्या प्रभाव पड़ने वाला है इसका स्पष्ट विवरण इस कविता में दिया गया है ।मनुष्य को विज्ञान ने आलसी अकर्मठ बना दिया है जो कवि की चिंता का प्रमुख कारण है। वह कहते हैं कि मैं मैं अंधकार से प्रकाश की ओर देखता हूं और उसकी रोशनी मुझे भविष्य तक लेकर जाती है। आगे वह कहते हैं कि दुनिया चाहे लाख बदल जाए लेकिन भारत हमेशा भारत बना रहेगा ।भारतवासी भारतेन्दू की नजर में बैलगाड़ी के समान ही है। युद्ध की वजह से जो ज्योति बुझी जा रही है वही ज्योति भारत में जलेगी और यांत्रिकता बाद के फलस्वरूप थकी हुई ...