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Showing posts from November, 2022
 राष्ट्रपति व्यवस्था में राष्ट्रपति पूरे देश का प्रधान होता है  और इसी प्रकार व शासन विभाग का भी प्रधान होता है प्रशासन विभाग का भी प्रधान होता है प्रोफेसर एलन बॉल के अनुसार राष्ट्रपति राष्ट्रपति भाविक और राजनीतिक प्रधान होता है इस व्यवस्था में राष्ट्रपति सर्विस ट्रोवा होता है जनता के प्रति उत्तरदाई इस शासन व्यवस्था में राष्ट्रपति का चुनाव एक निश्चित अवधि के लिए जन गण द्वारा होता है उनका चुनाव विधायिका द्वारा नहीं किया जाता है तथा राष्ट्रपति का दायित्व जनगण के प्रति होता है विधायिक के प्रति नहीं अधिकार विहीन मंत्री सभा इस व्यवस्था में मंत्री सभा अधिकार विहीन होती है राष्ट्रपति मंत्रियों की नियुक्ति करते हैं मंत्री सभा के सदस्य राष्ट्रपति के सहकर्मी नहीं ही नहीं बल्कि राष्ट्रपति के अधीन मात्र होते हैं राष्ट्रपति की इच्छा पर मंत्रियों का कार्यकाल निर्भर होता है  दलिए संख्या से कोई संपर्क -  विधायिका के दलीय संख्या से राष्ट्रपति को कोई मतलब नहीं होता राष्ट्रपति जिस जिस दल के सदस्य होते हैं उस दल का बहुमत विधायिका में हो भी सकता है और नहीं भी हो सकता  राष्ट्रपति नित...

कबीर के पद प्रश्न उत्तर

 1.  कबीर दास जी ने सत्य संगति का क्या महत्व बताते हैं? उतर -संत कबीर जी लोगों को सत्य संगति का महत्व महत्व बताते हुए कहते हैं कि हमको अच्छे लोगों की संगति करनी चाहिए । सज्जन व्यक्ति की संगति व्यर्थ नहीं जाती है बल्कि उसकी संगति से हमारा जीवन जीवन  चंदन की वृक्ष की तरह शीतल और सुगंधित कर देता है अर्थात अपने मन के विकारों का नाश कर देता है। 2  निंदक का क्या अर्थ है? कवि  निंदक को कहां बसाने की बात करता है? उतर।    निंदक का अर्थ बुराई करने वाला होता है   अर्थात निंदा करने वाला अर्थात बुराई करने वाला । कबीरदास जी कहते हैं कि जो हमारी निंदा करता है कबीरदास जी कहते हैं कि जो हमारी निंदा करता है हमें उसकी अवहेलना नहीं करनी चाहिए बल्कि उसके लिए अपने घर के आंगन में कुटिया बना देना चाहिए था उसे अपने पास रखना चाहिए इससे हमारे अंदर की बुराई  का पता हमें चलता है और हम उसे दूर कर सकेंगे जिससे कि हमारा व्यवहारहमारा व्यवहार निर्मल अर्थात अच्छा हो जाएगा।  3 कबीरदास के अनुसार साधु की संगति से क्या होता है? उतर।   -कबीरदास के अनुसार साधु की...

बांग्लादेश के उदय एवं उसमें से रहमान का भूमिका

 एक स्वतंत्र देश के रूप में बांग्लादेश के उदय एवं उसमें शेख मुजीबुर रहमान की भूमिका का वर्णन कीजिए भारत विभाजन के समय पूर्वी बंगाल को भी पाकिस्तान के अंतर्गत रखा गया था क्योंकि वहां के बहुत संख्यक निवासी इस्लाम के अनुयाई थे, परंतु भाषा और भौगोलिक दशा, संस्कृति तथा ऐतिहासिक परंपरा आदि की दृष्टि से पूर्वी बंगाल का शेष पाकिस्तान से कोई भी एक्य नहीं था। भाषा एवं संस्कृति आदि के भेदों के कारण पूर्वी बंगाल में यह आंदोलन जोर पकड़ने लगा कि पाकिस्तान में उनकी स्थिति एक स्वराज्य की होनी चाहिए यह तभी हो सकता था जब पाकिस्तान को एक संघ राज्य का रूप प्रदान कर दिया जाए ।पूर्वी बंगाल में स्वायत्त शासन प्राप्त करने हेतु आंदोलन के प्रमुख निम्नलिखित कारण थे -- पश्चिमी पंजाब और सिंध के संपन्न लोगों द्वारा बंगाल के आर्थिक जीवन पर प्रभुत्व स्थापित कर वहां के कारखानों को अपने अधिकार में ले लिया गया था जिससे बंगालियों का आर्थिक शोषण होता था पूर्वी बंगाल के राज पदाधिकारियों तथा सैनिक अफसरों में पंजाबियों की प्रमुखता थी और बंगालियों को ही दष्टि से देखते थे। पाकिस्तान की राजकीय आमदनी के बड़े भाग को पश्चिमी प...
 पाकिस्तान में उनकी स्थिति उनकी स्थिति स्वतंत्र राज्य की होनी चाहिए यह तभी हो सकता था जब पाकिस्तान को एक संघ राज्य का रूप प्रदान कर दिया जाए पूर्वी बंगाल में सत्ता शासन प्राप्त करने हेतु आंदोलन के निम्नलिखि कारण थे पश्चिमी पंजाब और सिंध के संपूर्ण लोगों द्वारा बंगाल के आर्थिक जीवन पर पर्वत स्थापित कर वहां के कारखानों को अपने अधिकार में ले लिया गया था जिससे बंगालियों का आर्थिक शोषण होता था नंबर दो पूर्वी बंगाल के पदाधिकारियों तथा सैनिक अवसरों में अक्षरों में अक्सर पंजाबियों की प्रमुखता की और बंगालियों को हिंद रिश्त देखते थे ईशा पाकिस्तान की राजकीय आमदनी के बड़े गांव को की राजकीय आमदनी के बड़े भाग को पश्चिमी पाकिस्तान पर खर्च किया जाता था जबकि पूर्वी बंगाल की आबादी अधिक थी और आय का अधिकांश भाग भी यहीं से प्राप्त होता था

Class 11 history questions and answers