प्रोजेक्ट क्या है ऐतिहासिक स्रोत के रूप में सिक्के का महत्व

   1)   प्रोजेक्ट क्या है ?

उतर--- किलपैट्रिक ने कहा है कि "प्रोजेक्ट किसी सामाजिक वातावरण में संपन्न हुआ एक उद्देश्य पूर्ण कार्य है   "

 प्रोजेक्ट कार्य किसी व्यक्ति को सृजनात्मक बनाता है प्रोजेक्ट एक ऐसा कार्य है जिसका एक विशेष उद्देश्य होता है तथा जो पूर्ण लगन और प्रयास के आधार पर पूरे किए जाते हैं।

2)   प्रोजेक्ट कार्य का क्या महत्व है?

उतर-- प्रोजेक्ट कार्य अपने आप में एक महत्व रखता है ःः

1 )शिक्षा के ज्ञान का व्यवहारिक महत्व :-प्रोजेक्ट कार्य करने से हमें शिक्षा अध्ययन के दौरान जो कुछ सीखते हैं उसका व्यवहारिक ज्ञान प्राप्त होता है ।

सामाजिक महत्व :-प्रोजेक्ट कार्य होने से शिक्षार्थियों को सैद्धांतिक अवधारणा का व्यवहारिक रूप प्राप्त होता है, जिसका  प्रयोग वे अपने आगे के जीवन में करते हैं, साथ ही साथ विभिन्न प्रकार के आंकड़ों का अध्ययन किताबों में देखते हैं वे आंकड़े कैसे संग्रह किया जाता है इसके बारे में प्रोजेक्ट कार्य करके जान पाते हैं-।

सृजनात्मकता को प्रोत्साहन:- प्रोजेक्ट कार्य का संबंध व्यवहारिक ज्ञान से है जिसमें परिदर्शन अवलोकन की क्रिया संपन्न होती है जो पर्यवेक्षण की क्रिया शिक्षार्थियों में सृजनात्मक कार्य करने को प्रोत्साहित करते हैं ।

वास्तविकता का ज्ञान:- प्रोजेक्ट कार्य करके विद्यार्थी गण यह समझ पाते हैं कि सैद्धांतिक ज्ञान तथा व्यवहारिक ज्ञान में किस प्रकार का अंतर होता है ।

समस्याओं को परिभाषित करना :-जब हम प्रोजेक्ट तैयार करते हैं तो हम विषय संबंधी समस्याओं को परिभाषित करते हैं इससे विद्यार्थियों में 1 गुण का विकास होता है जिससे वह अपनी बात को या समस्याओं को किसी के सामने व्यक्त कर सकते हैं ।अतः प्रोजेक्ट बच्चों के व्यक्तित्व विकास में सहायक है।


  

      ऐतिहासिक स्त्रोत के रूप में सिक्के का महत्व 

इतिहास को जानना मानव के लिए एक शब्द एक सबसे बड़ी जिज्ञासा रहे हो हमेशा इस बात को जानना चाहता है उसके अतीत में क्या हुआ था। लेकिन अतीत को जानना आसान नहीं है।

 "अतीत का अध्ययन करना है इतिहास कहलाता है।"

 इतिहास को जानने के लिए हमें अतीत के कई पन्नों को खोलना पड़ता है। अतीत को जानने के लिए हमें कई स्रोतों की आवश्यकता पड़ती है ।इन स्त्रोतों में जीवाश्म, गुफा, खुदाई के दौरान पाए गए वस्तु ,हथियार ,आभूषण, ताम्र लिपि, प्रशस्ति ,सिक्के इत्यादि हैं ।हालांकि सभी स्त्रोत इतिहास को जानने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है 

प्राचीन इतिहास को जानने के स्त्रोत में सिक्को या मुद्राओं तथा मोहरों का प्रमुख स्थान है। इन मुद्राओं से हमें विभिन्न राजाओं के नाम ,उनकी वंशावली ,महत्वपूर्ण तिथियां, धार्मिक विश्वास, उनकी रुचियां और उनके विभिन्न शौक का पता चलता है। इन प्राचीन सिक्कों से उस समय के देश की आर्थिक स्थिति, धातु के निष्कर्षण और उपयोग ,उद्योग का उत्थान पतन तथा विभिन्न देशों के साथ व्यापारिक संबंध तथा विभिन्न प्रकार के अन्य जानकारियां प्राप्त होती है।

सम्राट कनिष्क--- कनिष्क के द्वारा द्वारा चलाई गई विभिन्न मुद्राओं पर अंकित विभिन्न देवी-देवताओं के चित्रों से उसके धार्मिक विश्वास की जानकारी मिलती है ।उसके समय की प्राप्त मोहरों से भारत रूम की व्यापार की संबद्धता का पता चलता है गुप्त साम्राज्य की सिक्के ---गुप्त सम्राट समुद्रगुप्त के मुद्राओं में उसे बिना बजाते हुए दिखलाया गया है जिससे उसकी संगीत में रुचि होने का पता चलता है।

 मुहरे राजकीय और व्यापारी दोनों प्रकार की होती थी। पहले पहल ऐसी मोहरे हमें  हड़प्पा और मोहनजोदड़ो से प्राप्त हुई।

 इन मोहरा का प्रयोग व्यापार में किया जाता था। प्राचीन काल में भारत में निगम और  श्रेणी मोहरों का उपयोग में किया जाता था ।उदाहरण के लिए सम्राट हर्षवर्धन की दो मोहरे प्राप्त हुई है सोनीपत मोहर और नालंदा मुहर।

मौर्य कालीन सिक्के ---मौर्य काल सिक्के सोने चांदी तथा तांबे के बने होते थे ।इन सिक्कों को निष्ष्क और सुवर्ण कहा जाता था ।चांदी के सिक्कों को कासार्पण  या धरण कहा जाता था। यह करीब 3 .4 ग्राम वजन की बनी होती थी । सिक्कों की वैधता के लिए इन पर साही  मुहर अंकित किया जाता था। सीखो में अक्सर में अक्सर 5 पंच ,एक सूर्य ,एक 6 भुजा चिन्ह और तीन अन्य प्रति शामिल होते थे ,हालांकि गुप्त मौर्य काल में ज्यादातर और एक सूर्य ही पाया जाता है।

छत्तीसगढ़ में मौर्य काल के आहत सिक्के बहुत से स्थानों से प्राप्त हुए हैं जिनमें अकलतरा ठठारी और बिलासपुर मुख्य है


Comments

Popular posts from this blog

Xi political science MCQ

Kingship caste and class

AEC HINDI SEMESTER 2