गांधीवादी आदर्शों की प्रमुख विशेषताओं की चर्चा करें गांधीवाद के प हेडिंग दो मुख विचार

क पश्चिमी सभ्यता की समालोचना -। महात्मा गांधी भारतीय सभ्यता संस्कृति के महान पोशक थे। गाली दी की मान्यता थी कि पश्चिमी सभ्यता स्वार्थ पर आधारित है पंचमी व्यक्ति केवल अपने बारे में चिंतन करता है और भौतिक सुखों को महत्व देता है।

*गांधी जी भारत के प्राचीन धर्म शास्त्रों के अनुसार आचरण के पंचवाती थे पर इस संबंध में उनकी मान्यता थी कि किसी विचार को आंख मूंदकर सुधार नहीं किया जाना चाहिए उदाहरण स्वरूप उन्होंने छुआछूत का विरोध किया और अछुतो के लिए हरिजन नाम दिया ।

पश्चिमी राजनीतिक  लोकतंत्र गांधीजी पाश्चात्य सभ्यता की भांति पाश्चात्य लोकतांत्रिक शासन प्रणाली के विरोधी थे उन्होंने पश्चिमी लोकतंत्र की आलोचना निम्न आधार पर की थी पश्चिमी लोकतंत्र में सत्ता प्रतियोगिता के आधार पर मिलती है चुनाव में बहुमत प्राप्त दल का शक होता है इस व्यवस्था में सत्ताधारी दल और विरोधी दल में संघर्ष होता है।

गांधीजी ने ब्रिटेन की संसदीय लोकतंत्र की आलोचना इस आधार पर की गई वहां पर शासन संख्या पर आधारित है जिस दल को कुछ बहुमत प्राप्त हो जाता है वही सकता पर आते हो जाता है गांधीजी का मानना था कि शासन व्यवस्था इस प्रकार होनी चाहिए कि दुर्बल से दुर्बल और अल के व्यक्ति को भी वही अक्सर मिलना चाहिए जो सफल और बहुमत को मिलता है

गांधीजी पश्चिम के औद्योगिक सभ्यता के विरोधी थे क्योंकि यह साम्राज्यवाद पर आधारित वह चाहते हैं कि प्रत्येक हाथ को काम मिले और कोई बेरोजगार ना रहे अतः कुटीर उद्योग धंधे के समर्थक थे।

स्वतंत्रता व राज्य की अवधारणा--- गांधीजी ने राजनीतिक क्षेत्र में अहिंसात्मक राज्य की कल्पना की थी उनके अनुसार राज्य ऐसा होना चाहिए जो जनता की सहमति पर आधारित हो और व्यक्ति की स्वतंत्रता और उसके अधिकार सुरक्षित हो और आधी की शक्ति के विरोधी थे इनको शक्ति व्यक्ति की स्वतंत्रत के लिए खतरा पैदा कर सकती है कोई तो राज को केंद्रित रूप से हिंसा का प्रतिनिधि मानते थे उनका कहना था कि राज्य को हिंसा से अलग नहीं किया जा सकता है क्योंकि उसके अस्तित्व का आधार है सही है इसलिए वह अहिंसक राज्य की कामना करते थे जहां ना कोई राज्य होगा ना राजनैतिक सत्ता।

स्वतंत्रता और आर्थिक संगठन-- गांधीजी व्यक्ति की राजनीति में नहीं बल्कि आर्थिक क्षेत्र में भी स्वतंत्रता दिवस समर्थक थे और कई सभ्यता के विरोधी थे क्योंकि वह शक्ति का शोषण करता है यह संपत्ति संजय के विरोधी और संपत्ति को ईश्वर प्राप्ति में बाधा मानते थे श्रम के संबंध में गांधी हम आपके विचारों में समानता है गांधीजी ने के ऊपर अधिक बल दिया उन्होंने कहा जो व्यक्ति आता है उसे काम करना चाहिए उनके बनोवा भावे का कहना था कि बिना श्रम किए रोटी खाना पाप है।

गांधीजी बड़े-बड़े उद्योग के विरोधी थे उनका कहना था कि उद्योग गोली लगा है लगाया जाए जिसको जनसामान्य की आवश्यकता है इस सरकार के राष्ट्रीयकरण की नीति के भी विरोधी थे वह आर्थिक विकास के लिए सहकारिता व आधारित कुटीर उद्योग का समर्थन करते थे गांधीजी के विरोधी थे और शोषण के विरोधी थे 

संघर्ष  समाधान की पद्धतियां-- गांधी जी का संपूर्ण दर्शन साईं सत्य और अहिंसा के नए ठीक है कल पर आधारित था उन पर धार्मिक ग्रंथ और विचारों को का पूरा प्रभाव था अहिंसा उनके वैवाहिक जीवन का अंग बन गई थी गांधी जी गौतम बुद्ध महावीर स्वामी गीता उपनिषद और अन्य धार्मिक ग्रंथों के आत्मक सिद्धांत के पूर्ण रूप से प्रभावित थे उनकी प्रत्येक समस्या का समाधान अहिंसा और सत्य से हो जाता था।

संक्षेप9 में हम कह सकते हैं कि अहिंसा गांधी जी का धर्म था अभी जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में इस को व्यवहार में लाने को तत्पर रहते थे इसी बल के आधार पर उन्होंने शतक अंग्रेजी शक्तियों का मुकाबला कर भारत को स्वतंत्रता दिलाई थी।




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