कोठारी आयोग कक्षा 12

 प्राथमिक शिक्षा के बारे में कोठारी आयोग के सिफारिश की चर्चा करें

Answer :-*कोठारी आयोग का सर्व प्रधान लक्ष्य भारत की परंपराओं और मान्यताओं को ध्यान में रखकर नवीन आवश्यकताओं के अनुरूप राष्ट्रीय शिक्षा प्रणाली का विकास करना था शिक्षा द्वारा ही प्रत्येक राज्य का कल्याण संभव है यदि हम शिक्षा संबंधी व्यय को उत्पादक दिन योग के रूप में मांग ले तो राष्ट्रीय का हित अधिक हो सकता है। इस प्रकार राज्य शिक्षा आयोग की स्थापना के मूल्य में यह तथ्य भी विद्वान था कि राष्ट्रीय लोक कल्याण के माध्यम से शिक्षा के उत्पादकता के रूप में महत्व स्पष्ट किया जाए।

* कोठारी आयोग से पूर्व के शिक्षा आयोग ने शिक्षा के विविध बच्चों का अलग-अलग अनुशीलन कर उनके संबंध विचार व्यक्त किए थे शिक्षा के विभिन्न पक्षों को अपने आप में पूर्ण मान लिया था पर उचित यही है की संपूर्ण शिक्षा को एक नई इकाई मानकर इसके लिए निश्चित कदम उठाया जाए इस प्रकार राष्ट्रीय शिक्षा आयोग की स्थापना करते समय लक्ष्य भी था राष्ट्रीय शिक्षा आयोग का उद्देश्य भारत की परिस्थितियों के अनुसार शिक्षा का विनियोजन करना था।

* स्वतंत्रता के पश्चात देश के राष्ट्रीय जीवन में उनके अनेक परिवर्तन आए धर्मनिरपेक्ष जनतंत्र की स्थापना जनता की निर्धनता का उन्मूलन गति से देश का औद्योगिक विकास देसी समस्याओं के समाधान के लिए शिक्षा को आधार बनाया गया राष्ट्रीय शिक्षा आयोग ने इस बातों को ध्यान में रखा।

शिक्षा की संरचना :-आयोग ने शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए शैक्षिक ढांचे में परिवर्तन करने का सुझाव दिया आयोग ने 1 से 3 वर्ष तक की पूर्व प्राथमिक शिक्षा 10 वर्ष की सामान्य शिक्षा 2 वर्ष की उच्चतर माध्यमिक शिक्षा तथा थ्री वर्षीय उच्च  शिक्षा रखने का सुझाव दिया।

सम्पूर्ण शिक्षा की अवधि निम्नलिखित चरणों में विभाजित की गई :-

*पूर्व प्राथमिक शिक्षा 1 से 3 वर्ष 

*निम्न प्राथमिक शिक्षा 4 से 5 वर्ष 

*उच्च प्राथमिक शिक्षा दो से तीन बर्ष

 *निम्न माध्यमिक शिक्षा दो से तीन वर्ष

 *उच्च माध्यमिक शिक्षा दो वर्ष 

*स्नातक शिक्षा तीन वर्ष 

*दो या तीन वर्ष का स्नातकोत्तर कोर्स



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