Education class 12

 शारीरिक विकलांगों की शिक्षा से संबंधित प्रमुख समस्याएं निम्नलिखित:-

*अर्थाभाव:- अर्थ अभाव के कारण सरकार विकलांगों की शिक्षा हेतु ना तो कोई समुचित योजना निर्धारित कर पाती है और ना प्रचलित शिक्षालय को यथा संभव अनुदान ही दे पाती है।

*शिक्षालयो का अभाव:- विद्यालयों की संख्या आवश्यकता से अत्यधिक कम होने के कारण शिक्षार्थियों को बहुत बड़ी संख्या में विद्यालय में प्रवेश नहीं मिल पाता है।

 *अध्यापको का अभाव :-विकलांगों की शिक्षा के लिए प्रशिक्षित अध्यापकों का भी अभाव देखने को मिलता है इसलिए जो विद्यालय है वह भी शिक्षित अध्यापकों के अभाव से सही ढंग से शिक्षा ग्रहण नहीं कर पता है। 

*दोषपूर्ण  प्रशासन व्यवस्था:- दोषपूर्ण प्रशासन व्यवस्था भी शारीरिक विकलांगों की शिक्षण प्रक्रिय प्रक्रिया में बहुत बड़ी बाधा सिद्ध हो रही है ।प्रशासन व्यवस्था कुछ ऐसे लोगों के हाथों में है जो ऐसे विद्यार्थियों को के समस्याओं से अपरिचित है तथा विकलांग शिक्षा की साक्षमताओं का ज्ञान नहीं रखते अतः प्रशासन की स्थिति भी संतोषजनक एवं समस्या बहुल है।

* साधनों का अभाव :-हमारे यहां विकलांग शिक्षा के लिए आवश्यक साधनों तथा उपकरणों का अभाव है साधनों के अभाव बस विद्यालय अपने छात्रों को ऐसी शिक्षा नहीं दे पाए जिससे कि शिक्षा उपरांत हुए कोई स्वतंत्र व्यवसाय या उत्पादन मूलक कार्य कर सके।

* सामाजिक चेतना का अभाव:- विकलांगों के प्रति समाज में यहां तक की विकलांग संतानों को माता-पिता में संवेदना एवं संरक्षण की भावना प्रचुर मात्रा में है किंतु उनमें उसे चेतना का अभाव है जो विकलांग शिशु को उचित शिक्षण प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्मनिर्भर बन सके।

2) अंधे बच्चों को शिक्षित करने के क्या उद्देश्य है ?

उतर:- अंध शिक्षा का उद्देश्य :-a)शिशु को जहां तक संभव हो अपने परिवेश से सुपरिचित किया जाए जिस किसी अभी तरह हुए भौतिक जगत का परिचय पा सके उसे पाने में उसकी सहायता प्रदान करना ।

b)चुकिं दृष्टिहीन शिशु सामान्य अपनी असमर्थता के कारण ही ग्रंथि के शिकार होते हैं और सामान्य शिशुओं की भांति आत्मनिर्भर नहीं हो पाए और वह दूसरों पर आश्रित रहते हैं जिसके फलस्वरुप उनकी कार्य क्षमता प्रभावित होती है अतः उन्हें ऐसी शिक्षा प्रदान किया जाना चाहिए कि उनमें आत्मनिर्भरता एवं आत्मविश्वास की भावना जागृत हो सके ताकि वहीं ग्रंथि से मुक्त होकर समाज में स्वयं को अभीयोजित कर सके।

c) अंध शिक्षा का तीसरा प्रधान उद्देश्य शिक्षार्थियों में ऐसे मनोभाव की सृष्टि करना है जिसके माध्यम से समाज द्वारा स्वयं को अपरिहार्य सदस्य के रूप में स्वीकार किए जाने को अपना अधिकार समझे।

d) अंध शिक्षा के चौथे उद्देश्य के अनुसार शिशुओ की अन्य इंद्रियों की सक्रियता को कायम रखने क पर्यत्न किया जाना चाहिए ताकि वह उनका प्रयोग अधिक गति से करते रहे और कार्यरत हो तथा उनके कार्य क्षमता का विकास हो ।

e)अंध शिक्षा के पांचवें उद्देश्य के अनुसार शिक्षार्थी को ऐसी शिक्षा प्रदान किया जाना चाहिए जिसके फल स्वरुप उसकी मानसिक क्षमता का संरक्षण एवं विकास हो मानसिक क्षमता के विकास से उनकी वृत्ति मूलक दक्षता की वृद्धि होगी इस प्रकार उनके कार्य दक्षता की वृद्धि की जा सकती है।।

  क्योंकि अपनी सीमित क्षमता अनुसार अंधों को कार्य संपादन करने में अनेक प्रकार के असुविधायक चीनी पड़ती है इसीलिए सामान्य शिक्षा के उद्देश्य की भांति और शिक्षा उन्हें शक्ति सामर्थ और कुशलता प्रदान करने करें जिसकी सहायता से वह अपने दैनिक जीवन के कार्य  को सफलता को संपन्न कर सके।


३) 

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