नवपाषाण युग की प्रमुख विशेषताएं/class-11

 प्रश्न नवपाषाण काल की प्रमुख विशेषताओं पर एक संक्षिप्त लेख लिखिए।                         

उतर:-लैटिन भाषा के नैतिक शब्द का अर्थ है नया पत्थर ईसा पूर्व 8000 से ईसा पूर्व 3000 कालकोना पाषाण काल कहा जाता है इस काल में इतिहास में क्रांतिकारी परिवर्तन आया इस काल के लोग अपने पूर्ववर्ती काल की तुलना में अधिक कुशल थे और उन्होंने महत्वपूर्ण खोजे की इन महत्वपूर्ण खोजों के कारण वरना पाषाण काल के लोगों के जीवन में परिवर्तन आया इस काल में लोगों के जीवन में इतना अधिक परिवर्तन आया कि कुछ विद्वान इस काल को नवपाषाण  क्रांति कहना पसंद करते हैं ।

 इस काल की प्रमुख विशेषताएं हैंः- 

1) विकसित यंत्र और औजार-: इस काल के यंत्रों की विशेषता उनके ऊपर पॉलिश होना और उनका अधिक धारदार एवं छिन होना है इस योग का महत्व नियंत्रित सिर्फ था एक सूची तराशा गया पत्थर का टुकड़ा था इसका एक किनारा बहुत धारदार था इसका हैंडल लकड़ी का था इसका उपयोग लकड़ी एवं ब्रिज काटने के लिए होता था इसका आकार छोटी कुल्हाड़ी की तरह था दूसरा यंत्र पत्थर कहां हुआ था जिसका उपयोग घास काटने में होता था नवपाषाण काल की कुल्हाड़ी पहले की अपेक्षा अधिक ठीक थी इस काल के यंत्र यूरोप में विशेषकर फ्रांस में मिले भारत में दक्षिणी भारत की ब्रह्मगिरि में कुल्हाड़ी मिली है। 2)कृषि की शुरुआत अपने पूर्व युग में पौधों को उगने की थोड़ी जानकारी के बाद नवपाषाण काल के लोग पूर्ण कृषक बन गए शायद औरतों ने पहले कृषि आरंभ कि शायद उन्होंने पड़े अनु को खाली भूमि पर जलते देखा तो उनके मन में भी बीज बोने की बात आई और संभवत इस प्रकार कृषि का आरंभ हुआ कृषि आरंभ होने पर भोजन की अनिश्चितता समाप्त हो गई है इस प्रकार से ना पाषाण कालीन लोग भोजन संग्राहक से भोजन उत्पादक के रूप में परिवर्तित हो गए भारतीय उपमहाद्वीप में अनेक फसलें बोई जाती थी उदाहरण स्वरूप में गेहूं की खेती होती थी उत्तर प्रदेश के महा ग्राम में धान की कृषि होती थी उन फसलों के साथ ही घर में रहने पेश की शुरुआत और आधी काम शुरू हुए।

3) स्थाई जीवन की ओर -:कृषि ने लोगों को लंबे समय तक एक स्थान पर रहने को मजबूर किया पौधे के उगने पकने हम कटनी में अधिक समय लगता है। इसका मतलब है कि एक स्थान पर रहने के साथ लोगों ने पौधे की देखभाल में पानी देना फसल काटना आधी काम भी सीखने का स्थान पर रहने के लिए घर की आवश्यकता हुई ।उन्होंने जमीन खोदकर घर बनाना शुरू किया तथा घर में प्रवेश करने के लिए सिढिया बनाई वर्तमान कश्मीर में बुजहोम में इस प्रकार के घरों के अवशेष मिले हैं। नवपाषाण काल के लोग झोपड़ियों तथा चट्टानों की कंदराओ में भी रहा करते थे।

4)अन्न संगह तथा बर्तन:-

अन्नो को खाने एवं बीज के लिए रखना पड़ता था।वे उनको रखने के बारे में सोचने लगे । पकाने के लिए बर्तन के बारे में भी सोचे लगे ।इसके लिए वह मिट्टी के बड़े-बड़े बर्तन बनाने लगे। रस्सियो से टोकरिया बनाने लगे ।इस प्रकार आवश्यकता की साथ साथ में नहीं वस्तुओं का निर्माण होने लगा। मिट्टी के बर्तन बनाना नवपाषाण काल की महत्वपूर्ण उपलब्धि है ।इस काल में कुम्हार के चक्के की खोज एक तकनीकी खोज थी। इसकेलिए निश्चय ही मनुष्य को बहुत बुद्धि लगानी पड़ी होगी। प्रथम प्रयोग बर्तन बनाने में हुआ। नवपाषाण काल की दूसरी महत्वपूर्ण खोज वस्त्र थी ।चक्के के अविष्कार के बाद लोग इसका उपयोग बुनाई में करने लगे ,अब लोग जानवरों का चमड़ा और पेड़ों की छाल से शरीर नहीं  बल्कि कपड़ा पहनने लगे थे। पशुपालन ः

-कृषि करने के लिए बल की आवश्यकता होती है अन्य कार्यों की सुविधा के लिए इस काल के लोग पशु पालन करने लगे । मनुष्य का प्रथम पालतू जीव कुता था। बाद में लोग भोजन के लिए जानवर पालने लगे ।अपने आप स्वाभाविक रूप  से बढ़ते हैं। लोग सोचने लगेशांत स्वभाव के जानवर जैसे मवेशी भेड़, भैंस, बकरी पाले जाएंगे तो ये भोजन में काम आ सकते हैं ।ऐसे जानवरों की हड्डियों की खोज की है।  मेहरगढ़ की खुदाई में मवेशियों की हड्डियां मिली। वर्तमान बिहार की चिराण्ड में भैंस और बैल की हड्डियां खुदाई में प्राप्त हुई ।

कला और शिल्प:-

 इस काल की पुरातत्विक चित्रकारी पहले की चित्रकारी से भिन्न थी ।चित्रकारी में नए प्रतीकात्मक चिन्हों का प्रयोग हुआ। लिपी में भी सुधार हुआ। शिल्प में नए तत्वों का समावेश हुआ ।कुम्हार के चक्के के विचार के बाद अच्छे और बड़े आकार तथा रंगीन बर्तन बनने लगे ।

सामुदायिक जीवन/ श्रम जीवन

 भोजन मे निश्चिता ने मनुष्य को कुछ अवकाश दी।  वे अपना समय अन्य कार्यों में लगाने लगे पर ।स्थाई जीवन के लिए आवश्यक था कि लोग कुछ नियम कायदों का पालन करें ,ऐसा प्रतीत होता है कि समाज के वयोवृद्ध लोगों ने कुछ निर्णय लिए नवपाषाण काल में प्रत्येक व्यक्ति का कार्य निर्धारण संभव नहीं था पर निश्चित रूप से कहा जा सकता है कि कार्य का कुछ विभाजन हुआ। पहला कार्य विभाजन स्त्री और पुरुष के बीच हुआ ,कुछ काम दोनो द्वारा मिलकर किए जाते थे

नवपाषाण काल का महत्व का महत्व है कि इस काल में लोग भोजन संग्रहण से भोजन उत्पादक  बन गया और इसके साथ ही उसने सामुदायिक जीवन में स्थायित्व  लाया ।आदि मानव अपनी स्वार्थपरता और रूढ़िवादिता से आगे और उसके धार्मिक विश्वास से वृद्धि हुई ।रोगों के निवारण हेतु औषधियों का प्रयोग सीखा ।उसने व्यापार करना सीखा शासन व्यवस्था में सुधार लाया ।उत्तम कोटि के अस्त्र-शस्त्र बनाने लगा ।उसकी कला भी विकसित हुई ।इसका का सबसे बड़ा महत्व इस बात में है कि इस काल में मिस्र ,बेबीलोन और भारतीय उपमहाद्वीप में सभ्यताओं का उदय हुआ।

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