एथेंस में प्रजातंत्र की स्थापना और ग्रीक नगर राज्य का पतन

 एथेंस मेकिस प्रकार प्रजातंत्र की स्थापना हुई ?ग्रीक नगर राज्य का का पतन क्यों हो गया?

      अपने विकास के प्रारंभिक दौर में एथेंस के नगर राज्यों में राजा का शासन था। कोडरस एथेंस का अंतिम राजा था ।राजा की व्यवस्था को समाप्त कर यहां अल्पजन के शासन की स्थापना हुई और अल्पजन के शासन के साधारण जिनकी कोई आवाज नहीं थी उन्हें प्रशासन में किसी प्रकार का अधिकार नहीं था जब लोगों की ओर से असंतोष की आवाज उठी  तो व्यापारी वर्ग के लोग उच्च वर्ग के लोगों के साथ मिलकर सरकार में सुधार की ओर उन्मुख हुए। ईसा पूर्व 594 में लोगों ने सोलोन को जो एक  वद्वान व्यक्ति था, एथेनियन सरकार का प्रधान बनाने को कहा उसे आर्थिक और सामाजिक सुधार का संपूर्ण अधिकार दिया गया। सोलोन ने ईसा पूर्व 567 तक शासन किया । सोलोन ने एथेंस में प्रशासन के नियम कायदे बनाए सोलन एथेंस में प्रजातंत्र की स्थापना की।

        सोलोन के सुधार:-

सोलोन ने सभी एथेनियन नागरिको को एसेंबली के द्वारा सरकार में  हिस्सेदारी दी। उसने धनी लोगों के हाथों में अधिकार रहने दिया पर गरीब से गरीब व्यक्ति को भी मतदान का अधिकार दिया ।21वर्ष के ऊपर के प्रत्येक नागरिको को एसेंबली में बैठने का अधिकार दिया गया  एसेंबली के सभी विषयों पर वाद विवाद होता था और उस पर मतदान होता था इसके अतिरिक्त वहां पर काउंसलिं भी थी ।काउंसिल का निर्माण 500 लोगों को लेकर होता था जो समूह से चुने जाते थे काउंसिल का प्रमुख कार्य एसेंबली के लिए कानून बनाना था । सोलन में जन न्यायालयो  की स्थापना की, इसका उद्देश्य यह था कि  लोग कानून के बारे में प्रशासन का  कामकाज देखें।कानून  कोर्ट के सदस्यों का चुनाव जनसाधारण के बीच से होता था । सोलोमन के इस सुधार का मूल उद्देश्य था कि  कुलीन शासक जनता  के प्रति उत्तरदायी हो। 

           क्लेसिथनीज के सुधार

सोलन के बाद एथेंस  कुछ  अराजकतावादीयो के चंगुल में फंस गया । अराजकतावादी वे लोग थे जो संविधान के निर्धारित नियमों की अवहेलना कर शासन करते थे ।अराजकतावादियों के कुछ समय तक शासन के बाद एथेंस में एक प्रकार के प्रजातंत्र की स्थापना हुई। क्लेसिथनीज नामक व्यक्ति ने पुनः प्रजातंत्र की स्थापना की। ईसा पूर्व 508 में उसने सोलोमन के सुधार को जारी रखते हुए एथेंस में प्रथम जनतांत्रिक संविधान का निर्माण किया और जो पूरा अधिकार दिया उसने उन्हें नई परिस्थितियों के अनुकूल परिवर्तित किया। उसने ऐसी व्यवस्था की जिससे कि एक व्यक्ति के हाथ में असीमित अधिकार ना आने पाये। 

                एरिस्ट्राइडर्स के सुधार

फारस का युद्ध ईसा पूर्व 490 से 479 के काल में हुआ युद्ध के बाद एरिस्द्राइडस  सुधार किया गया ।सुधारों के बारे में उसके विचार अनुदार थे। पर युद्ध के बाद उसने अपने पुराने विचारों का परित्याग कर दिया और प्रजातांत्रिक सिद्धांतों का अनुकरण किया वह अपने विरोधियों के विचार से भी सहमत होने का प्रयास किया जो प्रजातंत्र के लिए आवश्यक था।

पेरीक्लीज  के सुधार

एथेंस की सर्वागीण उन्नति के पेरीक्लीज के समय में हुई। वह क्लेसिथनीज  के समान प्रजातंत्र का पक्षपाति था। उसमें वीरता और विद्वता कूट-कूट कर भरी पड़ी थी ।अपने इन गुणों के कारण वह 15 बार सेनापति के पद पर निर्वाचित हुआ ।अपनी विजयो के द्वारा उसने एथेंस को एक साम्राज्य के रूप में बदल दिया ।शासन व्यवस्था उसकी इतनी अच्छी थी कि प्रजा सुखी और संपन्न थी ।उसके शासन काल में कला कौशल एवं शिक्षा की खूब उन्नति हुई। वह एथेंस को संपूर्ण युनान का शिक्षा केंद्र बनाना चाहता था ।अपने इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए उसने अपनी सारी शक्ति लगा दी ।उसका शासनकाल में स्वर्ण युग माना जाता है।

ऐरोपैगस काउंसिल के अधिकारो की समाप्ति

एथेंस में एरोपैगस कार्उंसिल थी,  जिसका गठन सबसे धनी लोगों को लेकर हुआ था। पेरीप्लीज ने उनके सभी अधिकारों को समाप्त कर दिया।

साधारण जन से अधिकारियों का चुनाव

             जनतंत्र को और प्रभावशाली बनाने के लिए उसने अधिकारियों को चुनाव के संबंध में निर्णय दिया कि वह जनसाधारण के बीच से चुने जाएंगे।

वेतन प्रथा की शुरुआत

     पहले राज्य का काम लोग बिना किसी प्रकार का पारिश्रमिक लिए करते थे ।पेरीक्लीज ने सोचा कि गरीब लोगों के लिए ऐसा करना ठीक नहीं था।अतः उसने नियम बना है कि सरकार का काम करने वाले सभी लोगों को वेतन दिया जाएगा

          धनी लोगों पर जनसाधारण का बोझ

   पेरीप्लीज ने ऐसी व्यवस्था की कि सरकार के खर्चों का भार पर धनी लोग पर डाला जाए। गरीबों पर इसका भार नहीं डाला जाए ।धनीयो पर कोई स्थाई  कर नहीं लगाया गया पर धनी लोगों को एजेंसी नौसेना को संपन्न बनाने के लिए जल वाले जहाज देने पड़ते थे।

नगर राज्यों का पतन का कारण

 जनतंत्र वादी होने के गांधी नगर राज्य में बहुत कमियां देखने को मिली पूर्ण अधिकार अभी भी पूरी नागरिक को प्राप्त नहीं था पितृ श्राद्ध राशियों की स्थिति में कोई सुधार नहीं लाया गया था दांतो की संख्या दिन-ब-दिन बढ़ती चली जा रही थी नगर के शासकों ने यह तक नहीं माना कि प्रजातंत्र में दांत के लिए कोई स्थान नहीं होता है इन सब कमियों के कारण नगर राज्य का पतन हो चुका था।

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