HISTORY CLASS 11 WBCHSE 2018 SOLVE QUESTIONS
Group -c
Name four 'Riverine civilization '.why was this civilization flourished in the river valley?
Or
चार नदी तट्टीय सभ्यताओं के नाम लिखिए ।क्यों यह सभ्यताएं नदी घाटी क्षेत्रों में ही विकसित हुई?
उतर :- ईसा से 5000 वर्ष पूर्व लोगों द्वारा सभ्यता का विकास तीव्र गति से हुआ ।विगत हजारों वर्षों के अनुभव से मनुष्य ने सभ्यता के मार्ग पर लगातार पग बढ़ाया और नदी घाटियों में व स्थाई रूप से निवास करने लगा ।नदियों की घाटी में मनुष्य के स्थाई रूप से बसने को इतिहास में" नदी सभ्यता "या "नदी घाटी सभ्यता "नाम दिया गया है।
चार नदी घाटी सभ्यता में इस प्रकार हैः-
1) भारतीय महाद्वीप की बेलन नदी घाटी में स्थित मेहरगढ़ सभ्यता ।
2)भारतीय उपमहाद्वीप की सिंधु घाटी की सभ्यता ।
3)मिश्र की नदी घाटी सभ्यता।
4) मेसोपोटामिया की टाइगिस एवं युकेटिस नदी की घाटी सभ्यता।
नदी घाटियों में सभ्यता के विकास का कारण :-
अन्न उत्पादन का उपयुक्त स्थान:- मनुष्य की अपने द्वारा व्यवस्थित की जाने वाली प्रथम आवश्यकता भोजन है ।बहुत लंबे समय तक लोगों ने देखा कि शीतोष्ण जलवायु नदी घाटियों में पाई जाती है जो अनाज उत्पादन के अनुकूल है इस जलवायु में वर्ष में तीन फसलों की कृषी भी संभव थी ।
समतल भूमि :-ऊंची उठी भूमि कृषि के लिए सही नहीं होती है क्योंकि वर्षा काल में ऊपर की मिट्टी बह जाती है और समतल भूमि मिट्टी की ऊपरी परत का बहाव नहीं होता ।इस भूमि में फसलों का उत्पादन ठीक से होता है ।
जल की सुविधा :-कृषि एवं पीने के लिए जल आवश्यक होता है। लोगों ने पाया कि नदी के पास की भूमि कृषि के लिए उपयुक्त है। अतः प्रारंभिक मानव स्थानों पर बसने लगा जहां पर्याप्त मात्रा में जल संसाधन था। जल से उसे यातायात और ,मछली की भी सुविधा थी। जल से खेत में सिंचाई भी कर सकता था नदी में बाढ़ आने पर खेत में नयी मिट्टी पडती थी। जिससे खेत की उत्पादकता बढ़ जाती थी ।
लगातार कृषि सम्भव: पहले मानव खेत की उर्वरता समाप्त होने पर उस स्थान को छोड़कर अन्य स्थान पर चला जाता था। पर नदी घाटी में प्रतिवर्ष बाढ़ आने से मिट्टी नयी हो जाती थी तथा उसकी उर्वरता समाप्त नहीं होती थी इसलिए मानव को दूसरे स्थान पर नहीं जाना पड़ता था अतः इस भूमि में मनुष्य लगातार कर सकता था।
Question no:-2. What were the respective views of kautilya in the Arthasastra and Barni in the Fatawa-i-Jahandari regarding kingship and statecraft?
OR
कौटिल्य के अर्थशास्त्र और बढ़ने के पतरी जहां दरी में राजस्व एवं शासन के बारे में क्या विचार थे ।
उत्तर----कौटिल्य एवं राजत्व -: कौटिल्य ने राज्य की 7 प्रतिनिधियों का वर्णन किया है विप्र कृतियां है स्वामी अमात्य जनपद दुर्ग को बल तथा मित्र चाणक्य ने राजा के लिए स्वामी शब्द का प्रयोग किया है कौटिल्य राज्य को विस्तृत देखना चाहते थे अर्थशास्त्र के अनुसार राज्य का सर्वोच्च अधिकारी राजा होता है उनके आदेशों की अवहेलना किसी व्यक्ति द्वारा नहीं होनी चाहिए चाणक्य ने राजा को नियंत्रित करने में कहा है कि कोई भी राजा राष्ट्रीय नहीं है और राज्य का अंग है उसने राजा के लिए जिन गुणों को आवश्यक बतलाया है हुए हैं उच्च बुद्धि ,धार्मिकता, सत्यवादिता ,उत्साह ,श्रेष्ठ कामना करने वाला दूरदर्शी ,तीव्र स्मरण शक्तिवाला तथाआलस्यविहीन। कौटिल्य मानता है कि राजा को स्वेच्छाचारी नहीं होना चाहिए चाणक्य उपनिवेश विस्तार का समर्थन करता है
वरनी एवं राजत्व ः- बरनी के अनुसार शासकों की नियुक्ति ईश्वर द्वारा होती है और वह केवल ईश्वर के प्रति दाई है और किसी के प्रति नहीं वर्णित स्वयं भी इस धारणा का समर्थक था। स्वधर्म राज्य को जुड़वा मानता है वह यह भी कहता है कि लोगों को अपने शासकों का धर्म मारना चाहिए। वह निम्न वर्ग के लोगों के अस्तित्व को स्वीकार नहीं करता है वह राज्य में दार्शनिकों और बुद्ध जीवो के दामन की बात करता है।
कौटिल्य और शासन व्यवस्था- राज्य में शासन के लिए कौटिल्य ने मंत्रियों का होना आवश्यक बतलाया है उसके अनुसार आमत्य को उसी जनपद का निवासी होना चाहिए उसे निष्पक्ष होना चाहिए और उसमें वह क्षमता होनी चाहिए कि वह राजा को उचित मार्ग पर ले जा सके। राज्य का प्रमुख अंग बल है ।राजा इसके बल पर अपने शत्रु पर नियंत्रण कर सकता है वह मानता है कि सेना में कृतज्ञ सैनिक होने चाहिए युद्ध के समय उनको सामग्री से लैस होना चाहिए। सैनिक को दुख सहने में क्षमता होना चाहिए। कौटिल्य का मानना है कि पुरोहितो को पूजा पाठ करना चाहिए उसे किसी प्रकार राज्य को प्रभावित नहीं करना चाहिए।
वरनी और शासन व्यवस्था- फतवा ए में राज्य के स्वरूप राजा के आदर्श एवं अन्य प्रशासन संबंधी वर्णन है वर्ली सुल्तान के लिए इतिहास की जानकारी आवश्यक मानता है। उच्च वंश के महत्व को स्वीकार करता था उसके मान्यता थी कि निम्न कुल में उत्पन्न लोगों के राज्य के महत्वपूर्ण पद पर नहीं रखना चाहिए।जब वर्नी अत्याचार को इस्लाम विरोधी बतलाता है तो वह इसको सामाजिक रुप से न्याय पूर्ण मानता है। उसका कहना है कि दुष्ट लोगों की संख्या अधिक है अतः इसे लोगों के साथ जानवरों सा व्यवहार करना चाहिए।ऐसा दंड देने में वह किसी प्रकार की निर्दयता का समर्थन करता है वह मानता है कि राजा के पास मजबूत सेना होनी चाहिए शासन का कार्य पवित्र और धार्मिक लोगों को सौंपना चाहिए।
3) what were the features of polis and why did the polis decline?
OR
पोलिस की विशेषताएं क्या थी तथा इसका पतन क्यों हुआ।
पोलिस का अर्थ नगर राज्य होता है।
नगर राज्यों की विशेषताएं -:
1) नगर- राज्यों का उदय गांव के समूह में हुआ ।ग्रामीण लोग समतल मैदान में मैदान यात्री निवास करते थे ।उन्हें इस बात के लिए उत्साहित किया जाता था कि वह एकांत और सुरक्षित स्थानों को छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर एक साथ रहे।
2) ग्रामीण को सुरक्षा के लिए शहरों को दीवारों से घेर दिया जाता था ।
3) भौगोलिक दृष्टि से एक होने पर भी विभाजन की भावना तीव्र थी प्रत्येक नगर राज्य एक दूसरे से भेज रखते थे।
4) ग्रीक में उपजाऊ भूमि कम थी। अतः उन्हें दूर की भूमि से आवश्यकता की वस्तुएं लानी पड़ती थी इसलिए नगर आदि के लोग संगठित होकर सागर तट और बाजार की सुरक्षा पर विशेष ध्यान देते थे।
5) ग्रीक लोग विभिन्न दिव्पों से थे, पर वह सभी अपने को एक ही वंश का मानते थे । वह कबीलों में बंटे होते थे ।नगर राज्य के प्रशासन में प्रत्येक कबीला अपनी ताकत को बढ़ाने का प्रयास करता था।
नगर राज्य का पतन होने का कारण
पेरिक्लीज के संरक्षण में एथेंस का जनतंत्र पूर्णता को प्राप्त कर चुका था, किंतु इसमें कुछ कमियां रह गई थी ।पेरिक्लीज की जनतंत्रवादी व्यवस्था भी दोषपूर्ण थी, वैसे एंथेस में जनतंत्रवादी व्यवस्था थी ।पर कुल जनसंख्या के 1/ 7 भाग कोहीनागरिकता का अधिकार प्राप्त था दासो को कोई अधिकार ना था ।पूणअधिकार में नारियाँ भी नहीं आती थी ।सभी क्षमता एवं नैतिकता के बाद भी पेरिक्लीज ने दासकी कोई स्थिति में सुधार नहीं किया। उसने यही नहीं नहीं माना कि प्रजातंत्र में दास प्रथा को कोई स्थान नहीं होता और दासो की संख्या बहुत थी। अतःइन कमियों के कारण नगर राज्यों का पतन हो गया।
Question -:Mention the main characteristics of Manor system in the European feudal economy of middle age.
मध्य युग के यूरोपीय सामान्य अर्थ नीति में मेनर प्रथा की प्रमुख विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
उतर:- मेजर व्यवस्था की विशेषताएं :-
1) मेनर एक आर्थिक एवं राजनीतिक संगठन- मेनर प्रणाली सामंतवाद का आर्थिक संगठन था। जागीर एक राजनीतिक इकाई थी। जागीर बडी भी हो सकती थी और छोटी भी। एक इकाई में एक या एक से अधिक जागीर हो सकती थी। छोटी जागीर 300 से 400 तक की तथा बड़ी जागीर 5000 एकड़ तक की हो सकती थी ।जागीर का समाज जागीर को चारों तरफ वर्तमान रहता था ।गांव के अलग-बलग की बंजर भूमि तथा चारागाह सार्वजनिक होते थे। इसकी की देखरेख में जागीर का संरक्षण होता था ।प्रत्येक जागीर की भूमि भूमि कई भागों में बटी रहती थी और किसानों को उनके महत्व के अनुसार छोटा या बड़ा भाग दिया जाता था जो भाग भूमि पति अपने लिए रखता था उस पर कृषि कार्य करने वाले serf कहलाते थे ।
2)जागीर के स्वामी :-
जागीरदार अधिकतर कोई नाइट ,सामंत या विशप होता था।कुछ सरदार एक से अधिक जागीरो के मालिक होते थे। वे गढ़ या दुर्ग में रहते थे ।जागीरदार का किला जागीर के अन्य लोगों के लिए संकट के समय आश्रय स्थल होता था। इस किले में स्वामी के अन्य लोगों के लिए विशाल भवन उपासना आदि अलग-अलग होते थे ।गरीब लोग झोपड़ियों में रहते थे पर आक्रमण या युद्ध के समय अपने स्वामी के लिए चले जाते थे। सामंत की शक्ति के आधार पर जागिर रही थी ।सामंत की आय का एकमात्र साधन उनकी जमीन था जो वास्तविक अर्थों में जागीरदारों के कब्जे में रहती थी ।दूसरे शब्दों में कहा जा सकता है कि सामंतवाद की अर्थव्यवस्था पर जागीरदार पर आधारित थी।
3) एक आर्थिक ईकाई:-
आर्थिक दृष्टि से मेनर एक आत्मनिर्भर समुदाय था ।आवश्यकता की सभी वस्तुएं जैसे गेहूं जौ गांव में ही पैदा की जाती थी ।मेनर की सीमा के भीतर आटा पीसने की चक्की रहती थी ।कारीगर ,बढ़ई,लोहार ,कसाई का कार्य गांव के लोगों द्वारा होता था ।संक्षेप में यह कहना प्राप्त होगा कि मेनर की आर्थिक व्यवस्था अपने आप में व्यवस्थित और आत्मनिर्भर थी।
4)शासन व्यवस्था:-
आर्थिक व्यवस्था जिस प्रकार स्वतंत्र नहीं थी उसी प्रकार शासन व्यवस्था भी मेनर के अधीन थी अधिपति मेनर का स्वामी होता था ।उसकी सहायता के लिए तीन अधिकारी होते थे जो स्टीवर्ड बैलिफऔर रीव कहलाते थे ।steward का नियंत्रण ने मेनर पर होता था ,वही मेनर के न्यायालय का अध्यक्ष होता था ।बैलिफ का काम अधिपति के खेतों में निगरानी करना होता था। किसानों से वसूली का काम करता था। इसके अतिरिक्त एवं कृषकों के कार्य को देखने का काम उसी का था। किसानों के समय से वसूली नहीं देने पर वह उन पर जुर्माना लगा तथा तथा जुर्माना वसूल करता था ।रीवभूमि देशों का प्रतिनिधित्व करता था।
5) सर्वोच्च शासक
यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगा की जागीर के भीतर प्रत्येक सामंत सर्वशक्तिमान होता था वह अपनी जनता पर कर लगाता था मुकदमों का फैसला करता था और मनु अनुकूल कानूनों का निर्माण करता था उस समय राजनीतिक एकता का अभाव था राजा का जनता से कोई संबंध नहीं होता था वह किसी सामान के जागीरदार को भुला नहीं सकता था क्योंकि प्रत्येक अपने से बड़े सामंत को एवं जागीरदार अपने सामान को अपना अधिपति मानता था धर्म कार्य एक आत्मनिर्भर इकाई था फिर भी आ सकता के शहर से मंगाई जाती थी जो में उपलब्ध नहीं थी आवागमन के साधनों की कमी लूटपाट की अधिकता के कारण नहीं था गांव में विभिन्न प्रकार के काम करने वाले लोग रहते थे प्रत्येक गांव में छोटा था चर्चा एवं धर्म के पठन-पाठन के साथ ईसाई धर्म का कार्य भी होता था दो प्रकार के होते थे या का निर्णय किया जाता था दूसरे में देखे जाते थे भूमि पति के सम्मुख ली गई शपथ तोड़ता था या एक भूमि पति को छोड़ दूसरे भूमि पति की शरण में चला जाता था तो उसके मामले की सुनवाई पहले न्यायालय में होती थी पैसों के विद्रोह का सबसे साधारण था यह था कि वह भूमि पति के प्रति औपचारिक प्रभु शक्ति दिखाना बंद कर देते थे और विशाल के बीच का बंधन शांति और मेल पैदा करने के बदले लड़ाई झगड़ा अधिक पैदा करता था दूसरे न्यायालयों के मामले की सुनवाई होती थी इसमें आसाम से संबंधित दीवानी और फौजदारी दोनों प्रकार के मामलों पर विचार किया जाता था अधिकतर मामले से संबंधित होते थे जुर्माने की सजा दी जाती थी किंतु जाने का एक अच्छा सा साधन था इसका निर्णय नहीं होता था कानून की दृष्टि में सब बराबर नहीं जाते थे होने पर वादी और प्रतिवादी को कभी-कभी लेने की अनुमति दे दी जाती थी कभी-कभी द्वारा अपराध का निर्णय किया जाता था हाथ में लेकर चलना आधी रात हो जाने पर अपराधी को मारने की जाती थी अपराधों में फांसी दी जाती थी धर्म विरोधी को जलाकर मार डाला जाता था नियमों पर आधारित थी कि कानून का रूप धारण कर लेती थी भिन्न-भिन्न मैंने रूम में भिन्न-भिन्न कानून पर चली थी किंतु 12 वीं शताब्दी के अंत तक सामान्य कानूनों में कुछ एक उपचार दिखाई पड़ने लगी।
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