राधाकृष्णन आयोग के अनुसार उच्च शिक्षा का उद्देश्य और पाठ्य विषय

  विश्वविद्यालय शिक्षा आयोग द्वारा संस्तुति उच्च शिक्षा के के उद्देश्यों को लिखिए। 

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राधाकृष्णन आयोग के अनुसार उच्च शिक्षा का उद्देश्य और पाठ्य विषय का वर्णन कीजिए।

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स्वतंत्र भारत का प्रथम शैक्षिक आयोग कौन सा है इस आयोग के उच्च शिक्षा के संबंध में जोध्यये है थे उनका वर्णन करो।

उतर:- स्वतंत्र भारत का प्रथम शिक्षा आयोग राधाकृष्णन आयोग है।

आयोग के ध्येय :-

आयोग ने भारत की बदली हुई परिस्थितियों  में विश्वविद्यालय को अहम भूमिका निभाने का सुझाव दिया है ।उसके द्वारा निश्चित शिक्षा के उद्देश्यों को निम्नलिखित रुप में क्रमबद्ध किया जा सकता है-

 ऐसे व्यक्तियों का निर्माण करना जो शारीरिक दृष्टि से स्वास्थ्य और मानसिक दृष्टि  प्रबुद्ध हो ।

व्यक्तियों के अनुवांशिक गुणों को ज्ञात कर उनका विकास करना।

 ऐसे व्यक्तियों का निर्माण करना जो राजनीति प्रशासन, व्यवसाय ,उद्योग और वाणिज्य के क्षेत्र में नेतृत्व कर सके।

 ऐसे व्यक्तियों का निर्माण करना जो दूरदर्शी ,बुद्धिमान और बौद्धिक दृष्टि से श्रेष्ठ हो तथा समाज सुधार के कार्यों में सहयोग दे सकें।

 ऐसे नवयुवकों का निर्माण करना जो अपने सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण करें ।

विद्यार्थियों का चरित्र निर्माण करना तथा विद्यार्थियों में  प्रजातांत्रिक मूल्य जैसे समानता, स्वतंत्रता, भाईचारा और न्याय का संरक्षण करना ।

विद्यार्थियों में राष्ट्रीय अनुशासन की संभावना का विकास करना 

विद्यार्थियों में विश्व बंधुत्व और अंतर्राष्ट्रीय सद्भावना तथा आध्यात्मिक विकास करना ।

ऐसे विवेकशील नागरिक तैयार करना जो प्रजातंत्र को सफल बनाने के लिए शिक्षा का प्रसार करें ,ज्ञान की खोज करें,व्यवसाय का  प्रबंध करें और देश के भौतिक अभावों की पूर्ति करें।

उच्च शिक्षा का पाठ्यक्रम

 आयोग ने उच्च शिक्षा के पाठ्यक्रम में सुधार के साथ-साथ पूर्व की माध्यमिक शिक्षा के पाठ्यक्रम में सुधार के सुझाव भी दिए और दोनों स्तरों की विस्तृत वितरित पाठ्यक्रम  योजना प्रस्तुत की ।उसने उच्च शिक्षा के पाठ्यक्रम के संबंध में निम्नलिखित सुझाव दिए:-

 *   स्नातक स्तर पर सभी वर्गों ,-कला  विज्ञान व्यावसायिक का पाठ कर्म विस्तृत किया जाए उनमें छात्रों को अपने रुचि और आवश्यकता अनुसार विषयों के चयन की प्राप्त छुप हो ।

*  स्नातक स्तर पर सभी वर्गों कला विज्ञान और व्यावसायिक में सामान्य शिक्षा और धार्मिक शिक्षा अनिवार्य किया जाए।

*  सामान्य शिक्षा और विशिष्ट शिक्षा में समन्वय किया जाए। 

*   शोध कार्य के लिए कम से कम 2 वर्ष की अवधि अनिवार्य हो।  शोध कार्य के अवसर केवल  उन्हीं छात्रों को दिया जाए जो स्नातक स्तर पर कम से कम द्वितीय श्रेणी में उत्तीर्ण हो, शोध कार्य में रुचि हो और शोध कार्य करने की बौद्धिक क्षमता हो। इनका चयन भी अखिल भारतीय स्तर पर किया जाए।

*   स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम स्नातक कोर्स उत्तीर्ण छात्रों के लिए 2 वर्ष काऔर ऑनर्स कोर्स उत्तीर्ण छात्रों के लिए 1 वर्ष का हो ।

*  स्नातक स्तर पर अंग्रेजी भाषा और राष्ट्रभाषा हिंदी की शिक्षा अनिवार्य हो।

*   स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम में किसी एक विषय का गहन अध्ययन हीं कराया जाए ।इसमें यथा विषय की शोध विधियो का ज्ञान एवं प्रशिक्षण अनिवार्य हो।

*  व्यावसायिक एवं तकनीकी वर्ग के पाठ्यक्रम क्षेत्र  विशेषज्ञों की आवश्यकताओं के अनुसार विशेषज्ञों द्वारा तैयार कराया जाए, परंतु पूरे देश के स्नातक व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में समरूपता होनी चाहिए।

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