राष्ट्रपति व्यवस्था में राष्ट्रपति पूरे देश का प्रधान होता है  और इसी प्रकार व शासन विभाग का भी प्रधान होता है प्रशासन विभाग का भी प्रधान होता है प्रोफेसर एलन बॉल के अनुसार राष्ट्रपति राष्ट्रपति भाविक और राजनीतिक प्रधान होता है इस व्यवस्था में राष्ट्रपति सर्विस ट्रोवा होता है जनता के प्रति उत्तरदाई इस शासन व्यवस्था में राष्ट्रपति का चुनाव एक निश्चित अवधि के लिए जन गण द्वारा होता है उनका चुनाव विधायिका द्वारा नहीं किया जाता है तथा राष्ट्रपति का दायित्व जनगण के प्रति होता है विधायिक के प्रति नहीं अधिकार विहीन मंत्री सभा इस व्यवस्था में मंत्री सभा अधिकार विहीन होती है राष्ट्रपति मंत्रियों की नियुक्ति करते हैं मंत्री सभा के सदस्य राष्ट्रपति के सहकर्मी नहीं ही नहीं बल्कि राष्ट्रपति के अधीन मात्र होते हैं राष्ट्रपति की इच्छा पर मंत्रियों का कार्यकाल निर्भर होता है

 दलिए संख्या से कोई संपर्क -  विधायिका के दलीय संख्या से राष्ट्रपति को कोई मतलब नहीं होता राष्ट्रपति जिस जिस दल के सदस्य होते हैं उस दल का बहुमत विधायिका में हो भी सकता है और नहीं भी हो सकता 

राष्ट्रपति नितेश विधायिका राष्ट्रपति प्रणाली में राष्ट्रपति निरपेक्ष विधायिका निर्वाचन के संबंध में आदेश देने तथा उसे भंग करने के संबंध में राष्ट्रपति की कोई भूमिका नहीं होती राष्ट्रपति शासन व्यवस्था में विधान निर्माण में विधायिका पूर्ण रूप से स्वतंत्र होती है

 निर्वाचित शासन प्रधान राष्ट्रपति प्रणाली में प्रशासन विभाग के प्रधान राष्ट्रपति का चुनाव जनगण के द्वारा होता है  अन्य किसी प्रणाली में किसी प्रणाली से इस प्रणाली में राष्ट्रपति के चुनाव नहीं होता है राष्ट्रपति का चुनाव नहीं होता है

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