समानता के अधिकारों का वर्णन के अधिकारों का वर्णन कीजिए जो भारत के नागरिकों को संविधान द्वारा दिए गए हैं

भारतीय संविधान द्वारा दिए गए समानता के अधिकारों का  वर्ण 

मौलिक अधिकारों का वर्न में मौलिक अधिकारों को निम्नलिखित के भागों में विभक्त किया है

समता का अधिकार स्वतंत्रता का अधिकार शोषण के विरुद्ध अधिकार धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार संस्कृति और शिक्षा संबंधी अधिकार संवैधानिक उपचारों का अधिकार 

समता का अधिकार अनुच्छेद 14 15 16 17 और 18 समता का सिद्धांत निष्पक्षता पर बल देता है वह मानकर चलता है कि समाज में प्रत्येक व्यक्ति को आत्म विकास के समान अफसर उपलब्ध होने चाहिए तपेश्वर श्रीनिवास का कहना है कि इस अधिकार का उद्देश्य नागरिकों को राज्य द्वारा प्रशासनिक एवं वैधानिक क्षेत्रों में किए जाने वाले भेदभाव पूर्ण व्यवहार से सुरक्षा प्रदान करना है तथा सामाजिक असमानता की बुराई को कम करना है समता के अधिकार का वर्णन संविधान की 5 धारा में मिलता है।

कानून के समक्ष समता:- संविधान के अनुच्छेद 14 में कहा गया है-" रांची किसी भी व्यक्ति को कानून के समक्ष समता अथवा कानून के समान संरक्षण से वंचित नहीं करेगा" दूसरे शब्दों में कानून सब की समान रूप से रक्षा करेगा चाहे कोई कोई व्यक्ति ऊंचे पद पर हो या निकले पद पर धनी हो या गरीब गोरा हो या काला आदि कानून की दृष्टि में सब समान है

 भेदभाव की मनाही:- अनुच्छेद 15 दो बातें स्पष्ट करता है प्रथम राज्य केवल धर्म वंश जाति लिंग व जन्मस्थान या इन में से किसी एक का आधार पर नागरिकों के साथ भेदभाव नहीं करेगा दूसरा इनमें से किसी भी आधार पर कोई नागरिक दुकानों भोजनालय मनोरंजन की जगह तालाब और कुआं का इस्तेमाल करने से वंचित नहीं किया जा सकेगा

 इसके  दो अपवाद है -:क)  राज्य और तो और बच्चों के लिए विशेष प्रबंध कर सकता है संविधान के अनुच्छेद 15 (3)में इस बात का उल्लेख है कि इस बात का उल्लेख है कि सार्वजनिक स्थानों में जाने के समान अधिकारों के अंतर्गत स्त्रियों और बच्चों के लिए विशेष व्यवस्था करने का अधिकार राज्य को प्राप्त है

ख) राज्य सामाजिक दृष्टि से पिछड़े हुए वर्गों अनुसूचित जनजातियों की उन्नति के लिए विशेष प्रबंध कर सकती है

3 सरकारी नियुक्तियों के लिए अवसरों की समानताः- संविधान के अनुच्छेद 16 के अनुसार सरकारी नौकरियों के संबंध में हर नागरिकों को समान अवसर प्रदान किया जाएगा

अनुच्छेद 16 के निम्नलिखित अपवाद है -

 कुछ विशेष पदों के लिए निवास स्थान संबंधी शर्तें आवश्यक माने जा सकती है पिछड़े वर्गों के लिए सरकारी नौकरियों में कुछ स्थान आरक्षित रखे जा सकते हैं तथा यह व्यवस्था की जा जा सकेगी की धार्मिक या सांप्रदायिक संस्थाओं के के पदाधिकारी किसी विशेष धर्म या संप्रदाय के ही हो।

4) छुआछूत की समाप्ति :- भारत जैसे विशाल देश में जहां कई जाति या धर्म और वर्ग के लोग एक साथ रहते हैं वहां ऊंच-नीच और छुआछूत जैसी कुप्रथा है है इसलिए इस प्रथा को दूर करने के लिए प्रथा को कुप्रथा को दूर करने के लिए संविधान के अनुच्छेद 17 में प्रतिबंध की व्यवस्था की गई है

उपाधियों की समाप्ति:-

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