class 10 history west Bengal board

 1)भारत सभा की स्थापना के कोई दो उद्देश्य लिखिए!

उ-- भारतीय सभा के स्थापना के मुख्य उद्देश्य संपूर्ण देश में लोकमत का निर्माण करना, समान राजनीतिक उद्देश्य तथा आकांक्षाओं के आधार पर भारत की विभिन्न जातियों का एकीकरण करना, हिंदू और मुसलमानों के बीच एकता और मैत्री की स्थापना करना तथा सार्वजनिक आंदोलन में किसानों का सहयोग प्राप्त करना था।

2) आनंदमठ उपन्यास में किस प्रकार राष्ट्रीयता  की भावना का संचार किया?

उ-- 1882 ईसवी में ऋषि बंकिम चंद्र जी ने ऐतिहासिक सन्यासी विद्रोह के आधार पर आनंदमठ उपन्यास की रचना की इस उपन्यास के माध्यम से श्री बनर्जी ने बंगाल के युवा वर्ग में क्रांति की लहर ला दी ।इसे पढ़कर भारत का युवा वर्ग इतना आंदोलित हो गया कि वह भारत माता को स्वतंत्र कराने के लिए अपना सर्वस्व समर्पण करने को प्रस्तुत हो गए थे ।उपन्यास का वंदे मातरम गीत प्रत्येक क्रांतिकारी का मंत्र बन चुका था।

3 ) नारी इतिहास के ऊपर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।

उ -- महिला समाज के इतिहास लेखन का प्रयास सर्वप्रथम संयुक्त राज्य अमेरिका में हुआ था ।अमेरिका के अनेक विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम में इस विषय को रखा गया। भारत में महिलाओं के इतिहास में विद्वान को बहुत अधिक आकर्षित किया ।वैश्वीकरण ने इस क्षेत्र में तेजी ला दी तथा महिलाओं के इतिहास के संबंध में खोजा से संबंधित अनेक पुस्तकें प्रकाशित हुई ।आहलूवालिया की 'दी पिंकिंग बाउंड्रीज आफ फेमिनिज्म एंड इंटरनलिज्म'इस विषय की महत्वपूर्ण खोज है । प्रोफेसर सुकुमारी भट्टाचार्य ने भी महिलाओं की स्थिति के संबंध में महत्वपूर्ण खोज किया। भारतीय नारियों के इतिहास की कुछ महत्वपूर्ण पुस्तकें हैं -नीरा देसाई की 'वूमेन इन मॉडर्न इंडिया' वी आर आनंद की 'इंडियन वूमेन फ्रॉम परदा टू मॉडर्निटी', एन श्रीनिवासन की 'द चेंजिंग पोजीशन ऑफ इंडियन वूमेन'' ए फेमिनिस्ट पर्सपेक्टिव 'कमला भासिन की 'होयाट इज पैटियाकि' आदि संबंधी विषयों पर अनेक पत्र पत्रिकाएं भी निकल रही है।

4)सोम प्रकाश पत्रिका का संक्षिप्त विवरण दीजिए। 

उ।   सोम प्रकाश पत्रिका प्रकाशन 5 अगस्त 1858 ईश्वर चंद्र विद्यासागर के द्वारा की गई थी ।सोम प्रकाश पत्रिका सोमवार को प्रकाशित होने के कारण इसका नाम सोमप्रकाश पड़ा। इस पत्रिका के संस्थापक विद्यासागर तथा संपादक द्वारकानाथ विद्याभूषण थे। 28 वर्ष 9 महीने तक के पत्रिका प्रकाशित हुई इस पत्रिका का उदेद्श्य भारतीयों को राजनीतिक रूप से जागृत करना था। द्वारकानाथ की मृत्यु के बाद ईश्वरचंद इसके टृस्टी बनाये गये। इस पत्र ने अपनी निभिकता का परिचय देते हुए ब्रिटिश औपनिवेशिक नीति,  नील किसानों का शोषण , जमीदार ,उद्योगपति तथा 1908 के न्यूज़पेपर एक्ट की जमकर आलोचना की ।यह पत्र अपनी सरल और आकर्षक भाषा तथा निष्पक्ष आंदोलन के कारण ही लोकप्रियता के चरम शिखर पर पहुंच गया ।दिल्ली इंक्वायरी कमीशन के समक्ष बयान देते हुए  ने इस पत्र के बारे में कहा पाक्षिको ने भारतीय जनता के मुखपत्र के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई ।लॉर्ड  लिखन वर्नाकुलर प्रेस एक्ट के संपादक द्वारकानाथ को अपने घर बुलाकर को बंद करने का अनुरोध किया वर्नाकुलर प्रेस एक्ट वापस ले लिया गया तो इसका प्रकाशन पूरा चालू हुआ पर यह अपने प्राचीन गौरव को प्राप्त नहीं कर पाया।.

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