कौटिल्य के अर्थशास्त्र और बरनीके फतवा ए जहांदारी राजस्व एवं शासन के बारे में राज्य शासन के बारे में क्या विचार है विचार थे 

Ans - कौटिल्य एवं राजस्व- कॉटन के ताप पर कितने राज्य की प्रकृति का वर्णन किया कौटिल्य ने राज्य की प्रकृति का वर्णन किया जो इस प्रकार है स्वामी स्वामी अमात्य जनपद दुर्ग स्वामी अमात्य जनपद दुर्ग को बल और मित्र चाणक्य ने राजा के लिए स्वामी शब्द का प्रयोग किया है कौटिल्य राज्य को विस्तृत देखना चाहते थे अर्थशास्त्र के अनुसार राज्य का सर्वोच्च अधिकारी राजा होता है उनके आदेशों की अवहेलना किसी व्यक्ति द्वारा नहीं होनी चाहिए चाणक्य ने राजा को नियंत्रित करने में कहां है कि कोई भी राजा राष्ट्रीय नहीं है वह राज्य का अंग है चाणक्य ने राजा के लिए उच्च बुद्धि धार्मिकता सत्यवादी ता उत्साह श्रेष्ठ कामना करने वाला दूरदर्शी स्मरण शक्ति वाला कर्मठ आदि गुणों से लिप्त होने की बात कही है होटल यह मानता है कि रा राजा को स्वेच्छाचारी नहीं होना चाहिए

बरनी एवं राजस्व बरनी के अनुसार शासकों की नियुक्ति ईश्वर द्वारा होती है वह केवल ईश्वर के प्रति दाई ईश्वर के प्रति दाई होता है वह धर्म और राज्य को एक मानता है उनके अनुसार लोगों को अपने शासक का धर्म मानना चाहिए ।वह निम्न वर्ग के लोगों के अस्तित्व को स्वीकार नहीं करता है ।राज्य में दार्शनिकों और बुद्धिजीवीयो के दमन की बात करता है।

कौटिल्य  और शासन राज्य में शासन के लिए कौटिल्य ने मंत्रियों का होना आवश्यक बतलाया है उसके अनुसार अमात्य को उसी जनपद का निवासी होना चाहिए उसे निष्पक्ष और उसने वह क्षमता होनी चाहिए कि वह राजा को उचित मार्ग पर ले जा सके राज्य का प्रमुख अंग बल है राजा इसी के बल पर अपने शत्रु पर नियंत्रण कर सकता है वह मानता है कि सेना में कृतज्ञ  सैनिक होना चाहिए तथा तथा युद्ध के समय  सामग्री लैस भी होना चाहिए। कौटिल्य का मानना है कि पुरोहित को पूजा पाठ करना चाहिए उसे किसी प्रकार राज्य को प्रभावित नहीं करना चाहिए।

वरनी और शासन व्यवस्था  - फतवा ए जहां दारी में राज्य के स्वरूप राजा के आदर्श एवं अन्य प्रशासन संबंधी वर्णन है बरनी सुल्तान के लिए इतिहास की जानकारी आवश्यक मानता है। वरुण धवन के महत्व को स्वीकार करता है तथा उनकी मान्यता थी कि निम्न कुल में उत्पन्न लोगों को राज्य के महत्वपूर्ण पद पर नहीं रखना चाहिए जब वरनी अत्याचार को इस्लाम विरोधी बतलाता है तो वह स्कोर मानता है सामाजिक रूप से न्याय पूर्ण मानता है उसका कहना है कि दुष्ट लोगों की संख्या अधिक है तथा ऐसे लोगों के साथ जानवरों जानवरों से व्यवहार करना चाहिए ऐसा दंड देने में वह किसी प्रकार की निर्दयता का समर्थन करता है ।

मंडारिन किसे कहा जाता है उनकी नियुक्ति कैसे होती थी उनके क्या-क्या कार्य थे

मंडल शब्द मंडारिन शब्द पुर्तगाली भाषा के शब्द मंडारिन शब्द से आया है जिसकी उत्पत्ति संस्कृत मंत्री शब्द से हुई है जिसका अर्थ मंत्री होता है मंडारिन विद्वान नौकरशाह होते थे  जो चीन के साम्राज्य ईसा पूर्व 221 से 1912 के शासन व्यवस्था की देखभाल करते थे

मंडारिन होने के लिए प्रशासन के साथ-साथ काव्य एवं साहित्य रचना साहित्य रचना साहित्य रचना करते थे कन्फ्यूशियस शिक्षा पर विचार किया करते थे मनाली में पद पर नियुक्ति करते समय व्यक्ति के जन्म बेटी के जन्म वन कुलीनता पर विचार ना कर उसकी शिक्षा एवं योगिता पर विचार किया जाता था 

मंडारिन होने के लिए कठिन परीक्षा पास करनी पड़ती थी कठिन परीक्षा पास करनी पड़ती थी पास करनी पड़ती थी उनमें कन्फ्यूशियस के आदर्शों के बारे में गहरे ज्ञान की परीक्षा होती परीक्षा होती थी इस पद पर नियुक्ति के लिए साहित्य काव्य राजनैतिक जानकारी का होना आवश्यक होता था परीक्षा इतनी कठिन होती थी कि भी लोग इस पद को प्राप्त नहीं कर पाते थे। पहरेदार ,अपराधी ,श्रमिक, भिक्षुक को मंडारिन की परीक्षा में सम्मिलित होने का अधिकारी नहीं था

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