History 11(2023)
What do you understand by the system discuss the nature of the state under the Sultans of Delhi
इक्ता व्यवस्था से तात्पर्य एकता का अर्थ होता है एक हिस्सा। वास्तविक अर्थों में एक तरह से सल्तनत काल में भूमि को दूसरे को देने के समान था। इतना ग्रहण वाला इक्तादार कहा जाता था ।इक्तादार लोग सल्तनत काल में शासक वर्ग से आते थे। इक्ता व्यवस्था पूरे इस्लामी संसार में व्याप्त थी। मोहम्मद गौरी ने भारत में इक्ता व्यवस्था को लागू किया था। इक्तदारो को कर वसूलने का अधिकार सम्राट से प्राप्त होता था ।इस कर से वह अपनी व्यवस्था करते थे उसके बदले उन्हें राजा के प्रति कुछ कर्तव्य करने पड़ते थे जैसे वह सेना रखते थे ,आवश्यकता पड़ने पर राजा को देते थे ।इस सरकार इक्तादार पर संग्रह और सैन्य व्यवस्था का कार्य करता था।
दिल्ली सल्तनत के अंतर्गत राज्य की स्वरूप अथवा प्रकृति:-
दिल्ली सल्तनत की राष्ट्रीय प्रकृति के बारे में विद्वानों में मतभेद है। डॉक्टर ए एल ,श्रीवास्तव डॉ प्रसाद ,डॉ राम शरण शर्मा जैसे विद्वान मानते हैं कि दिल्ली सल्तनत की प्रकृति धर्मआश्रयी थे दूसरी तरफ सल्तनत कालीन इतिहास का जियाउद्दीन बरनी ने सुल्तानी राष्ट्र को धर्मनिरपेक्ष कहां है ।डॉ सतीश चंद्र डॉक्टर, मोहम्मद हबीब आदि आधुनिक इतिहास का इसका समर्थन करते नजर आते हैं।
धर्मा कथन के समर्थन में तर्क- अलाउद्दीन खिलजी को छोड़कर सभी दिल्ली सकता सल्तनत कालीन इस्लामी संसार के शासक और धर्म गुरु खलीफा से स्वीकृत प्राप्त करते थे एवं उसके प्रति भक्ति प्रकट प्रशासन चलाते थे। सुल्तानी शासन में उलेमाओं की भूमिका महत्वपूर्ण होती थी इस्लामी कानून शरीयत के व्याख्या करता उलेमा आशा करते थे कि सुल्तान गैर मुसलमानों के विनाश का प्रयास करेंगे और शरीयत के कानून को मानते हुए भारत को दारुल इस्लाम इस्लाम की पवित्र भूमि बना देंगे सुल्तानी शासनकाल में गैर मुस्लिम हिंदुओं की उपेक्षा की गई और वित्तीय श्रेणी के नागरिक हो गए हिंदुओं पर जजिया कर लगाया गया थ।
शरीयत के अनुसार सर्वोच्च क्षमता का अधिकारी अल्लाह है उनके पहले प्रतिनिधि और हजरत मोहब्बत उसके बाद खलीफा किंतु भारत के सुल्तानी राष्ट्र में इस नियम से अलग स्वतंत्र राष्ट्र तंत्र स्थापित हुआ कोई कोई सुल्तान राजनीतिक कारणों से खलीफा के अवश्य अनुमति लेते थे और यह सुल्तान की मात्र इच्छा पर निर्भर होता था इस्लामी कानून के अनुसार खलीफा समस्त मुस्लिम धर्म और राष्ट्र का प्रधान होने पर भी भारत में इस नीति को महत्व नहीं मिला यहां के सुल्तान खलीफा के नियंत्रण से स्वतंत्र होकर राज्य चलाते थे सुल्तानी शासन में हिंदुओं का महत्व पूर्ण समाप्त नहीं हुआ कुछ हिंदू उच्च पदों पर भी नियुक्त होते थे देश में कई स्थानों पर हिंदू का आदि पाते था सल्तनत काल में उलेमाओं को पूर्ण रूप से प्रभावित नहीं कर पाते थे सही अर्थों में वह सुल्तान के ऊपर निर्भर होकर कार्य करते थे।
De officiis --- cicero
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