2023 important questions history
* पेशेवर इतिहास किसे कहते हैं ?पेशेवर इतिहास तथा गैर पेशेवर इतिहास में क्या अंतर है?
Answer. 19वीं शताब्दी में इतिहासकारों के द्वारा स्वतंत्र और निष्पक्ष भाव से शिक्षा और ज्ञान की दृष्टि से इतिहास की घटनाओं को समय व्यक्ति स्थान और सत्य घटनाओं के प्रमाणिकता के साथ लिखे गये। उनकी इसी दृष्टि से लिखे गए इतिहास को पेशेवर इतिहास कहा जाता है।
पेशेवर और गैर पेशेवर इतिहास में अंतर--:
पेशेवर और गैर पेशेवर दोनों ही इतिहास के अंग है फिर भी इन दोनों में अंतर देखा जाता है। पेशेवर इतिहास लेखन की परंपरा 19वीं शताब्दी में उपनिवेशवाद और साम्राज्यवाद की घटते प्रभाव के बाद शुरू हुई तो गैर पेशेवर इतिहास लेखन की परंपरा इतिहास लेखन काल से चली आ रही है ।पेशेवर इतिहास लेखन में समय, स्थान, व्यक्ति और घटनाओं को अधिक महत्व दिया जाता है जबकि गैर पेशेवर इतिहास में केवल रोचक और मनोरंजन कोई महत्व दिया जाता है ।पेशेवर इतिहास स्वतंत्र निर्पेक्ष इतिहासकारों द्वारा तर्क ,अनुसंधान और प्रमाण के आधार पर लिखे जाते हैं जबकि गैर पेशेवर इतिहास राजाओं ,महाराजाओं ,सुल्तानों ,नवाबों जैसे शासकों के व्यक्तिगत एकता के आधार पर लिखा जाता था। पेशेवर इतिहास पूर्ण प्रमाणित और सर्वमान्य होता है जबकि गैर पर इतिहास अपूर्ण अप्रमाणित और सर्वमान्य नहीं होता है। व्यवसायिक इतिहास लेखन का उद्देश्य ज्ञान, शिक्षा और अनुसंधान को बढ़ावा देना है जबकि गैर पेशेवर इतिहास शासकों का मनोरंजन करना।पेशेवर इतिहास लेखन का क्षेत्र विस्तृत और व्यापक है जबकि गैर पेशेवर इतिहास का क्षेत्र कुछ बडी़ बडी़ घटनाओ तक ही सीमित होता है।
उपर्युक्त विवेचन के आधार पर स्पष्ट होता है कि पेशेवर और गैर पेशेवर इतिहास दोनों एक दूसरे से भिन्न है । पेशेवर इतिहास अतीत की सत्य घटी घटनाओं के आधार पर वर्तमान को सुंदर तथा भविष्य को अति सुंदर, सुरक्षित और आनंदमय बनाने का प्रयास करता है, तो दूसरी ओर गैर पेशेवर इतिहास राजाओं महाराजाओं के केवल गुणों का गुणगान करने तक ही सीमित है।
* संग्रहालय के विभिन्न वर्गों या प्रकारों की विवेचना कीजिए
उतर --- उपलब्धि सामग्री प्रकृति उद्देश्य व्यवस्था आदि के आधार पर संग्रहालय की कई प्रकार है उनमें से कुछ प्रकारों का विवरण इस प्रकार है:-
ऐतिहासिक संग्रहालय:- ऐतिहासिक घटनाओं से संबंधित विभिन्न प्रकार की वस्तुएं दस्तावेज युद्ध सामग्री जैसे अन्य वस्तु संग्रहित एवं सुरक्षित की जाती है उसे ऐतिहासिक संग्रहालय कहते हैं इसका उद्देश्य अतिथि सांस्कृतिक धरोहर से वर्तमान और भावी पीढ़ी को परिचित कराते हुए उसे आगे बढ़ाना होता है कोलकाता का भारतीय संग्रहालय इसी संग्रहालय का एक उदाहरण है।
कला संग्रहालय :-संग्रहालय प्राचीन एवं नवीन दुर्लभ कलाकृतियां जैसे मूर्ति चित्रकारी का संग्रह किया जाता है उसे कला संग्रहालय कहा जाता है ।इसकी स्थापना का उद्देश्य कलाकृतियों के साथ-साथ उसके बनाने वाले कलाकारों को उनके बारे में जानकारी प्राप्त करना होता है ।पेरिस का' लावरे' विश्व का पहला कला म्यूजियम है ।इंग्लैंड के ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में स्थित अस्थोमोले इसका सुंदर उदाहरण है।
पुरातात्विक संग्रहालय :- वे संग्रहालय जिनमें अति प्राचीन काल की खुदाई में प्राप्त हुआ पुरातात्विक वस्तुएं जैसे पत्थर के हथियार, बर्तन, मूर्तियां ,शिलालेख, पांडुलिपि ,सिक्के, मोहरे, जीवाश्म आदि संग्रहित किए जाते हैं ,उसे पुरातात्विक संग्रहालय कहते हैं । इसका उद्देश्य प्राप्त सामग्रियों के आधार पर प्राचीन काल के इतिहास की व्याख्या करना है अमेरिका का शिकागो ,ईरान का राष्ट्रीय संग्रहालय, एथेंस का अंगोरा संग्रहालय इसके उदाहरण है ।
व्यक्तिगत संग्रहालय :-वे संग्रहालय जहां व्यक्ति अपनी पसंद की चीजों को सहेज कर अपने घर के किसी एक कमरे में रखता है, उसे व्यक्तिगत संग्रहालय कहते हैं ।इसकी देखरेख संचालन व्यक्ति स्वयं करता है इसका मालिक भी वह स्वंय होता है ।महान खिलाड़ियों, कलाकारों, राजाओं ,महाराजाओं के संग्रहालय इसके उदाहरण है ।
क्षेत्रीय संग्रहालय :-वह संग्रहालय जिसमें क्षेत्र विशेष की वस्तुओं का संग्रह किया जाता है उसे कहते हैं ।इसका उद्देश्य क्षेत्र के वस्तुओं को को देश-दुनिया से परिचित कराना है। इलाहाबाद कौशांबी, मथुरा संग्रहालय,पटना संग्रहालय उदाहरण है।
राष्ट्रीय संग्रहालय:- संग्रहालय देश के लगभग सभी प्रकार के महत्वपूर्ण और उद्देश्य वस्तुओं का संग्रह किया जाता है,राष्ट्रीय संग्रहालय कहते हैं । इसमें पड़ोसी देश और विश्वा की वस्तुओं का भी संग्रह होता है। इसका उद्देश्य विविध सभ्यता और संस्कृति को सुरक्षित रखते हुए आने वाली पीढ़ी को परिचित कराना है ।भारत का दिल्ली का राष्ट्रीय संग्रहालय उदाहरण है।
उपयुक्त संग्रहालय के के अतिरिक्त मुद्रण संग्रहालय ,औद्योगिक संग्रहालय, शैक्षणिक संग्रहालय, यातायात संग्रहालय, समुद्र संग्रहालय ,सूचना और संचार संग्रहालय आदि अन्य संग्रहालय का भी विकास पाया जाता है।
* पौराणिक कहानी और किवदंती से आप क्या समझते हैं? भूतकाल के बारे में मनुष्य की समझ को क्या आकार देते हैं?
उतर। पुरानी कहानी से तात्पर्य उस कहानी से है जो सुदूर इतिहास से संबंधित है ।प्रोफेसर रोमिला थापर के अनुसार यह एक प्रकार का आद्ध इतिहास है।
किवदंती-- मौखिक मौखिक इतिहास के रूप में किवदंती की महत्वपूर्ण भूमिका है। किंवदंतियों में जो घटनाएं दी गई दी गई है या जिन चरित्रों का उल्लेख किया गया है उन घटनाओं और चरित्रों को सही मानकर विश्वास किया जाता है । किंवदंतियों में में इतिहास के अनेक स्त्रोत उपलब्ध है। इतिहासकारर मानते हैं कि मनुष्य के सामाजिक परिवर्तन के बहुत दिनों बाद की गलतियों की शुरुआत हुई।
पौराणिक कहानिया एवं किंवदंतियों को इतिहास नहीं माना जा सकता है लेकिन इनसे इतिहास से संबंधित बहुत सारी जानकारियां हमें प्राप्त होती है ।भूतकाल के लोगों एवं उनकी सभ्यता आदि के बारे में बहुत कुछ जानकारियां इतिहासकार को इनसे प्राप्त होता है। इतिहास निर्माण में सहायक होता है ।आज का इतिहास का निर्माण इन के आधार पर ही किया जाता है। हिंदू राजपूत राजा अपनी उत्पत्ति सूर्य और चंद्रमा से मानते थे। सुर्य से उत्पन्न होने वाले अपने को सूर्यवंशी और चंद्रमा से उत्पन्न वाले अपने को चंद्रवंशीय मानते थे ।दुष्यंत और शकुंतला से उत्पन्न भरत के नाम पर ही देश का नाम भारत पड़ा ।दुष्यंत और शकुंतला की कहानी भी पौराणिक कहानी की है ।पुरानी कहानी में जो तत्व है वह आधुनिक इतिहास लेखन में भी उपलब्ध है ।पुरानी कहानियां तथा किवंदन्तिया वर्तमान समाज से जुड़ी हुई है । पौराणिक कथाएं तथा किंवदंतियों की घटनाओं को पूर्ण रूप से स्वीकार नहीं किया जा सकता पर इतना मानना ही पड़ेगा कि यह घटना किसी ना किसी रूप में भूतकाल में अवश्य घटित हुई होगी ।राम कृष्ण महाभारत रामायण किसी भी प्रकार पूर्ण रूप से गलत नहीं हो सकते। धनुष्कोटी का वर्णन रामायण में आया है और आज विज्ञान भी इसे स्वीकार कर रहा है ।पौराणिक कहानियां आज भी समाज को नैतिक शिक्षा का पाठ पढ़ाती है ।भारत में आज भी रामायण के पात्र अनुकरणीय है।
* उपनिवेशवाद और साम्राज्यवाद पर हाब्सन - लेनिन सिद्धांत का वर्णन कीजिए।
उतर--- प्रसिद्ध अर्थशास्त्री जॉन हाब्सन और सोवियत रूस के कम्युनिस्ट नेता लेनिन ने उपनिवेशवाद और साम्राज्यवाद पर अपना सिद्धांत प्रतिपादित किया है।
हाब्सन --- सन 1902 में जॉन हासन ने अपनी पुस्तक इंपिरियलिज्म में साम्राज्यवाद के बारे में अपना मंतव्य प्रकट किया। उन्होंने साम्राज्यवाद को गंदा व्यापार कहां ,उन्होंने बैंकों की बाढ़ लाकर असंतुष्ट लोगों की भुभाग पर अधिकार कर साम्राज्यवाद की स्थापना को न्यायिक राष्ट्रवाद का नीच कार्य कहा।हाब्सन के सिद्धांत ने साम्राज्यवाद के कारणों को स्पष्ट रूप से बतलाया है उन्होंने कहा कि साम्राज्यवाद का सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक कारण विनियोग का प्रभाव है ।अपने कथन के समर्थन में उन्होंने ब्रिटिश साम्राज्यवाद का उदाहरण दिया। उन्होंने ब्रिटेन के विदेश में तीव्र होने वाले विनियोग एवं तीव्र गति से बढ़ने वाले ब्रिटिश साम्राज्यवाद के बीच ऐतिहासिक संबंध को दिखाया है।
लेनिन --- प्रथम विश्व युद्ध के समय 1916 में लेनिन की "इंपिरियलिज्म द लास्ट स्टेज ऑफ़ कैपिटलिजम "प्रकाशित हुई इस पुस्तक में साम्राज्यवाद के बारे में अपना विचार व्यक्त किया है। निजी रिकार्डों से ज्ञात होता है कि लेनिन साम्राज्यवाद के बारे में हाब्सन के विचारों से परिचित थे ।उनके अनुसार पश्चिमी साम्राज्यवाद वित्तीय पूंजी और विनियोग दबाव पर आधारित था। व वित्तीय पूंजी में बैंकों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है सभी पूंजी पतियों को एक बृहद एकाधिकारी के रूप में एकत्र कर देते हैं और उनके बीच की प्रतिस्पर्धा को समाप्त कर देते हैं ।लेनिन ने साम्राज्यवाद को पूंजीवाद के विकास के रूप में माना है।
क्या हाब्सन - लेनिन के सिद्धांत में वास्तविकता है--
फिल्ड हाउस में साम्राज्यवाद की उत्पत्ति के संबंध में विभिन्न विचारों का अध्ययन किया और उसने कुछ प्रश्न उठाए जो निम्नलिखित है---
अनेक लोगों का मानना है कि ये लोग पेशे से इतिहासकार नहीं थे इ,नके द्वारा जो सिद्धांत दिया गया वह राजनीतिक पैंम्पलेट के अतिरिक्त कुछ नहीं है । प्रत्येक ने तत्कालीन राजनीतिक उद्देश्य लिखा था ।हाब्सन का तात्कालिक उद्देश्य दक्षिणी अफ़्रीका में बोआर युद्ध से सुरक्षा था। युद्ध में अफ्रीका के बोअर अंग्रेज उपनिवेशवादियों से लड़ रहे थे ।लेनिन के संबंध में कहा जाता है कि उसका उद्देश्य सेकंड इंटरनेशनल(second international) की समाप्ति करना था । सेकंड इंटरनेशनल साम्वायदियों का अंतरराष्ट्रीय संगठन था। जिसकी स्थापना 1889 मे पेरिस में हुई थी।
कुछ विद्वानों ने दोनों के सिद्धांतों के बीच महत्वपूर्ण अंतर देखा है ।लेनिन ने आर्थिक एकाधिकार पर जोर दिया है जो साम्राज्यवाद के विस्तार की ताकत है, हॉब्सन इस बारे में कुछ भी नहीं कहता। हाब्सन ने विस्तार को साम्राज्यवाद के विस्तार से जुड़ा, पर लेनिन की साम्राज्यवाद की परिभाषा लोचदार है ।इसके अंतर्गत औपचारिक नियंत्रण भी आता है। हाब्सन ने अपना विचार व्यक्त किया है कि संकट को विशेषकर ब्रिटिश पूंजीवाद को सुधारों द्वारा मिटाया जा सकता है पर लेनिन का मानना है कि पूंजीवाद पूरे विश्व की समस्या है जो क्रांति को जन्म देगी।
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