हिंदी साहित्य का इतिहास कक्षा 12th

 खड़ी बोली हिंदी के विकास के किन्हीं दो प्रमुख कारणों को लिखिए 
 उतर----आजकल जिसे हिंदी कहां जाता है वह खड़ी बोली का विकसित रूप है इसके वर्तमान मानव स्वरूप का विकास 19वीं शताब्दी में हुआ है परंतु इसका आरंभिक रूप 10 वीं शताब्दी नहीं दिखाई देने लगा था चौधरी शताब्दी के आरंभ में अमीर खुसरो ने खड़ी बोली में पहेलियां रखकर साहित्य लेखन का श्रीगणेश कर दिया था अमीर खुसरो ने खड़ी बोली का प्रयोग करना आरंभ किया और उसमें कुछ कविताओं की रचना की जो सरल तथा सरस होने के कारण शीघ्र ही प्रचलित हो गई उत्तर भारत की इस खड़ी बोली हो मुसलमान सांसद दक्षिण भारत में गए हैं और इसका मुसलमान शासक दक्षिण भारत में ले गए और इसका प्रयोग बोलचाल के रूप में करने लगे सरल होने के कारण इसका प्रयोग बोलचाल में अधिक होने लगा 19वीं और 20वीं शताब्दी में जनसंपर्क की सशक्त भाषा होने के कारण खड़ी बोली का विकास हुआ ज्ञान विज्ञान और जनसंपर्क को एक गद्य  भाषा की आवश्यकता थी जबकि ब्रज मैथिली और अवधि काव्य भाषाएं थी ।खड़ी बोली के विकास का मार्ग स्वयं प्रशस्त हो गया और इसे ज्ञान का वाहन बनाने के लिए स्वाभाविक रूप से चुना गया उन्हीं दिनों भारत में छापेखाने का आगमन हुआ छापेखाने के आगमन से राजनीतिक चेतना का उदय हुआ पत्र-पत्रिकाओं का उद्भव और प्रचार हुआ लोकतंत्रात्मक भावनाओं का वातावरण बना शिक्षा का विकास हुआ जिससे जिसके परिणाम स्वरूप खड़ी बोली देश ने प्रसारित हो गई और राष्ट्रीय एकता का भी पर्याय बन गई खड़ी होली को लोकप्रिय बनाने में भारतीय हिंदू हरिश्चंद्र मैथिलीशरण गुप्त प्रेमचंद साहित्यकारों ने महत्वपूर्ण योगदान दीया महावीर प्रसाद द्विवेदी रामचंद्र शुक्ल विदेशी विद्वानों ने इसका व्याकरण शुद्ध मानक रूप दिया सौभाग्य से स्वामी विवेकानंद दयानंद सरस्वती बाल गंगाधर तिलक महात्मा गांधी सुभाष चंद्र बोस आदि महापुरुषों ने दी हिंदी के माध्यम से राष्ट्रीय चेतना और देश प्रेम की भावना को जगाया स्वतंत्रता आंदोलन के दिनों में खड़ी बोली हिंदी ही राष्ट्र को एक सूत्र में बांधने में अग्रणी रही उपर्युक्त कारणों से हिंदी बोली देश में संपर्क भाषा के रूप में विकास हुआ था 1949 ई0 मे इसे संविधान में राजभाषा का गौरवशाली सम्मान प्रदान किया गया



2) खड़ी बोली के विकास में सरस्वती प्रेस के योगदान को स्पष्ट कीजिए
उतर-- प्रेस की स्थापना नहीं हिंदी भाषा और साहित्य प्रतिष्ठा के उचित स्थान पर स्थापित किया भले ही प्रदेश का आज व्यवसाय बन गया किंतु एक समय था जब प्रेस को मिशन समझा जाता था जब प्रवेश पत्र पत्रिकाओं के माध्यम से सामने आया उसकी भूमिका थी। पत्रकार आचार्य महावीर प्रसाद द्ववेदी जी ने सरस्वती पत्रिका के माध्यम से खड़ी बोली हिंदी को प्रशिक्षित एवं व्यवस्थित करने का काम किया हिंदी की विकास यात्रा को गंतव्य तक पहुंचाने का कार्य सम्राट मुंशी प्रेमचंद ने किया महावीर प्रसाद द्विवेदी की भाषा परिष्करण में जा हिंदी को व्याकरण के नियमों में बांधकर उसे अनुशासित एवं मानक रूप प्रदान करने का प्रयास किया गया वहीं मुंशी प्रेमचंद हिंदी और उर्दू मिश्रित आम बोलचाल की भाषा का प्रयोग करके अपने कथा साहित्य को जनसामान्य के लिए बनाया हिंदी किस भाषा के प्रयोग ने बना दिया इसलिए उन्होंने बनारस में 1923 ईस्वी में स्थापना की जहां से उनकी कहानियां एवं उपन्यास छपते थे बाद में 1930 ईस्वी में उन्होंने हंस को सरस्वती पे ही निकालना शुरू किया प्रेस की स्थापना से खड़ी बोली हिंदी का व्यापक प्रचार हुआ इस प्रेस से छपने वाले हंस पत्रिका प्रगतिशील हिंदी साहित्य की मुखपत्र बने हंसने वाली कहानियां निबंध एवं विचारों से हिंदी भाषा और साहित्य को काफी बल मिला इस प्रकार मुंशी प्रेमचंद के माध्यम से आम बोलचाल की भाषा को हिंदी में प्रतिष्ठित किया एवं खड़ी बोली हिंदी की एक नवीन शैली को विकसित किया

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