उदारवाद
1 उदारवाद से आप क्या समझते हैं तथा उदारवाद की विशेषताओं को संक्षिप्त में लिखिए?
उदारवाद एक महत्वपूर्ण विचारधारा है उदारवाद की निम्नलिखित विशेषताएं हैं
व्यक्ति की की सर्वोच्च महानता- शास्त्रीय उदारवाद की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि उदारवाद मानव व्यक्ति की असीम मूल्य तथा व्यक्तियों की आध्यात्मिक समानता है विश्वास रखता है उदारवाद व्यक्ति को राजनीतिक सामाजिक तथा आर्थिक व्यवस्था का केंद्र बिंदु मानता है व्यक्ति समाज में स्वतंत्र अस्तित्व है शास्त्रीय उदारवाद व्यक्ति की स्वतंत्रता में विश्वास रखता
मानव की स्वतंत्रता- मनुष्य जन्म से ही स्वतंत्र है और स्वतंत्रता उसका प्राकृतिक एवं जन्मसिद्ध अधिकार है स्वतंत्रता कार्य है कि मनुष्य के जीवन पर किसी सकता का नियंत्रण ना हो और उसे अपने विवेक के अनुसार आचरण की स्वतंत्रता हो रास्ता उदारवाद मानव की सत्ता का महान पोषक है
लोकतंत्र का समर्थन स्वतंत्रता- लोकतंत्र उदारवाद का अभिन्न अंग है उदारवाद का जनहित स्वेच्छाचारी शासन के विरुद्ध प्रतिक्रिया के रूप में है और लोकतंत्र उदारवाद का मूल तत्व है उदारवाद लो प्रभु सत्ता में विश्वास रखता है
इतिहास तथा परंपरा का विरोध -- मध्य युग में अंधविश्वास जरूरी बात परंपराओं का बोलबाला था उदारवाद अंधविश्वास और रोगियों के विरुद्ध विद्रोह था उदार वादियों ने इस बात पर जोर दिया कि उन्हीं संस्थाओं सिद्धांतों तथा कानूनों इत्यादि को स्वीकार किया जाए जो विवेक के साथ न्याय संगत हो।
संवैधानिक शासन -उदारवाद का उदय निरंकुश एवं स्वच्छता री शासन की प्रतिक्रिया के रूप में हुआ इसलिए उदारवाद निरंकुश शासन विरोधी है उदारवाद सीमित सरकार अर्थात सरकार की सीमित शक्तियों का समर्थन करता है
धर्मनिरपेक्षता में विश्वास- उदारवादी उन्हें धार्मिक संस्थाओं को राज्य से अलग रखने की बात कही और सभी व्यक्तियों को समान रूप से धर्म की स्वतंत्रता देने पर बल दिया उदारवाद के अनुसार धर्म व्यक्ति का व्यक्तिगत मामला है और राज्य को व्यक्ति के धर्म में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए
व्यक्ति शब्द और राज्य साधन के रूप में-- उदारवाद व्यक्ति को संस्था और राज्य को साधन मानते हैं मानवीय संस्थाएं और समुदाय व्यक्ति के लिए बने हैं इसलिए राज्य का कार्य व्यक्ति की सेवा करना है वह सेवक है स्वामी नहीं व्यक्ति के उद्देश्य की पूर्ति करना है राज्य का उद्देश्य है।
व्यक्ति के प्राकृतिक अधिकारों की धारणा में विश्वास --उदारवाद व्यक्ति के प्राकृतिक अधिकारों में विश्वास करता है प्राकृतिक अधिकार हुए हैं जो व्यक्ति को जन्म से ही प्राप्त होते हैं ब्लॉक के अनुसार जीवन स्वतंत्रता और संपत्ति के अधिकार प्रमुख प्राकृतिक अधिकार है राज्य एवं समाज प्राकृतिक अधिकारों का उल्लंघन नहीं कर सकती राधिका परम कर्तव्य प्राकृतिक अधिकारों की रक्षा करना है।
2) कार्ल मार्क्स की राष्ट्रीय संबंधी सिद्धांत या तत्व की चर्चा
कीजिए।
उतर -- मार्क्सवादी होने राज्य के विकास के लिए विभिन्न इमो पर विचार किया
आदिम युग एंजल के अनुसार इतिहास में ऐसे भी युग थे जब राज्य तथा राज्य सस्त नाम की कोई चीज नहीं थी प्राचीन युग इसका उदाहरण है इस युग में पूर्ण समाजवाद था प्राकृतिक साधनों पर सबको समान अधिकार था अतः इसे आदिम साम्यवाद का युग कहा जाता है उत्पादन की प्रणाली में परिवर्तन आने के कारण समाज वर्गों में विभाजित हुआ जिसे कारण राज्य की उत्पत्ति हुई आर्थिक रूप में परिवर्तन के कारण गुलाम पर स्वामित्व वाला समाज आया या एक सामान्य युग थ अंत में पूंजीवादी युग का आगमन हुआ
गुलाम युग आदिम युग के बाद गुलाम युग का आरंभ हुआ मनुष्य ने कृषि और पशुपालन करना शुरू किया आर्थिक कारणों से समाज में परिवर्तन आया एक कबील दूसरे कविले को हराकर अपना गुलाम बनाते थे और उनके खेती का काम लेते थे इस गुलामी प्रथा के कारण समाज में दो वर्गों का जन्म हुआ गुलाम के मालिक तथा गुलाम यहीं से राज्य की उत्पत्ति हुई ऐसा माना जाता है कि स्वामी ने प्रभावशाली लोगशासक बन रहे थे।
सामंती युग-- भूमि का महत्व बढ़ता ही सामान 30 का आगमन हुआ राजतंत्र में राजाओं के पास रहने वाले लोग सामंत बन बैठे वह भूमि के स्वामी बन बैठे हुए स्वयं खेती नहीं करते थे वह किसानों के द्वारा खेती कर आते थे इस युग में औद्योगिक विकास हुआ नगरों की स्थापना हुई समाज दो वर्गों में बढ़ गया जिसमें भूमि पति और व्यापारी एक तरफ से तो दूसरी तरफ किसान और दाल इस युग में राज्य की शक्ति में काफी वृद्धि हुई।
पूंजीपति समाज -- अधिकरण के कारण लगभग पूरे विश्व में मौलिक परिवर्तन आया इंग्लैंड फ्रांस अमेरिका तथा जर्मनी आदि देशों का विकास हुआ लोग गांव को छोड़कर शहर की ओर भाग गए पूरे विश्व में समाज दो भाग में बढ़ गया। पूंजीपति वर्ग तथा मजदूर वर्ग। समाज के लिए 2 वर्ग काफी परिवर्तन के बाद आज भी कायम है। कार्ल मार्क्स का कहना है कि मजदूर वर्ग क्रांति द्वारा वर्तमान गुरुद्वारा राज्य को समाप्त कर देगा और एक मजदूर राज्य की स्थापना करेगा ।
वर्गहीन समाज
Q--What is meant by Marxism .discuss the main principles of Marxism
मार्क्सवाद से क्या तात्पर्य है मार्क्सवाद के प्रमुख सिद्धांतों का वर्णन कीजिए
--- मार्क्सवादी विचारधारा के जन्मदाता कॉल मार्क्स तथा फेडरिक है । दोनों विचारों को का इतिहास समाजशास्त्र विज्ञान अर्थशास्त्र को राजनीति विज्ञान की समस्याओं पर संयुक्त राष्ट्र रूप से विचार करके जिस विचारधारा को जन्म दिया उसे मार्क्सवाद कहते हैं।
मार्क्स की प्रसिद्ध पुस्तकों में दास कैपिटल द कम्युनिस्ट मेनिफेस्टो तथा क्रिटीक आफ पॉलीटिकल इकोनाम आदि प्रमुख है।
मार्क्सवाद के सिद्धांत --
द्वंदात्मक भौतिकवाद ---मार्क्स ने इस सिद्धांत को जर्मन के विद्वान भीगिल से प्राप्त किया था कि गेल के अनुसार संसार के संपूर्ण विकास का कारण विरोध हो का संघर्ष है मानव विकास की व्याख्या का आधार विचारों और चेतना को माना था वह मार्क्स ने भौतिक तत्वों को मानव इतिहास का आधार माना मानव इतिहास का निर्माण समाज के उत्पादन के अनुसार होता है समाज का इतिहास उत्पादन का इतिहास है रिया को अपनाया ऐतिहासिक परिवर्तन को स्पष्ट करती है इस परिवर्तन की प्रक्रिया में किसी समय विशेष में सामाजिक शक्तियों के एक समूह को बाद दूसरे को प्रतिवाद और तीसरे को संवाद कहते हैं जिसमें लगातार संघर्ष चलता रहता है
मार्क्स ने दंडात्मक भौतिकवाद द्वारा समाज के विकास के इतिहास की व्याख्या की है। इस व्याख्या के अनुसार समाज में विभिन्न वर्ग होते हैं और उन विभिन्न वर्गों के अपने हित होते हैं। अतः विभिन्न वर्गों के अलग-अलग अपने हितों के कारण उनमें संघर्ष चलता रहता है। यह संघर्ष तब तक चलता रहेगा जब तक सभी वर्ग समाप्त होकर मजदूर वर्ग में नहीं मिल जाता। एक वर्ग व्यवस्था ही आदर्श व्यवस्था है।
इतिहास की भौतिकवादी या आर्थिक व्यवस्था ------मार्क्स ने इतिहास की व्याख्या भौतिकवाद के अनुसार की है उसके अनुसार समस्त इतिहास का विकास भौतिक अवस्थाओं के कारण हुआ है इससे तात्पर्य उत्पादन के साधनों और धन के वितरण से हैं मार्क्स के अनुसार जैसे उत्पादों के साधनों में परिवर्तन होता है वैसे वैसे राजनीतिक सामाजिक धार्मिक तथा नैतिक परिवर्तन भी होते हैं पादन के साधन और वितरण की व्यवस्था व्यवस्था कहा जाता है उसी के द्वारा प्रत्येक युग के राजनीतिक सामाजिक धार्मिक सभ्यता संस्कृति और नैतिकता के नियम निश्चित होते हैं।
आलोचना---- आर्थिक तत्व पर अधिक बल Marx की व्याख्या आर्थिक तत्व पर करना सही नहीं है क्योंकि इतिहास के विकास में आर्थिक तत्वों के अतिरिक्त भौतिक सामाजिक मानवीय विचारधारा की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
Marx अपने आर्थिक आधार पर जो आर्थिक विकास के विभिन्न गुणों का वर्णन किया है ।
मार्क्स की राजनीति समाज की अवधारणा कि गलत है काल्पनिक और अव्यावहारिक है।
अतिरिक्त मूल्य का सिद्धांत --इस सिद्धांत का Marx विस्तृत वर्णन दास कैपिटल में किया है ।Marx रिकॉर्ड की भांति इस तथ्य पर बल दिया है किसी वस्तु का मूल्य उसके उत्पादन में निश्चित होता है कुछ पैदा नहीं करती उसका उत्पादन के द्वारा होता है.
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