Gandhi's ideas about Satyagraha class 12
Analyse Gandhi's ideas about Satyagraha.
सत्याग्रह के संबंध में गांधी जी के विचारों का विश्लेषण कीजिए।
गांधी का विश्वास था कि हर तरह से संघर्ष का समाधान इसने और सच्चाई द्वारा संभव है।
सत्याग्रह का शाब्दिक अर्थ है सत्य के लिए आग्रह करना गांधी जी ने सत्याग्रह को प्यार की शक्ति अथवा आत्म बल का नाम दिया है। गांधी जी ने कहा था -"कड़ी से कड़ी चीज प्यार की अग्नि से पिघल जाती है यदि और ना पिघले तो समझना कि आँच की तेजी में कुछ कमी है।"
सत्याग्रह की विभिन्न प्रणालियां सत्याग्रह की विभिन्न प्रणालियां है जैसे उपवास ,स्वैच्छिक दिशांतरण,हड़ताल ,असहयोग तथा सविनय अवज्ञा।
उपवास ---उपवास सकठिन तपस्या है पर किसी पर दबाव डालने का यह श्रेष्ठ साधन है। उपवास रखने वाला अपने विपक्षी को किसी भी तरह का शारीरिक आर्थिक कष्ट नहीं पहुंचाता को संकट उठाता है और आत्म शुद्धि के साथ-साथ विपक्षी को भी बदलने की कोशिश करता है।
स्वैच्छिक दिशांतरण---इसका अर्थ है अपनी इच्छा से कोई स्थान या देश छोड़कर कहीं अन्यत्र जाकर बसना। गांधी जी ने देशा़ंतरण की सलाह उन लोगों को दी जो किसी स्थान विशेष पर आत्मसम्मान के साथ रहने की स्थिति में ना हो।
हड़ताल--- हड़ताल का अर्थ यह है कि काम धंधा बंद करके अपनी मांगे मनवाने की कोशिश की जाए आमतौर पर श्रमिक या छात्र या अन्य कर्मचारी हड़ताल के माध्यम से अपना विरोध प्रकट करते हैं। पर हड़ताल के दौरान हिंसा या अपने साथियों के साथ जोर जबरदस्ती का व्यवहार ना किया जाए ।
असहयोग असहयोग आंदोलन ---- असहयोग आंदोलन का सार यह है कि अन्याय को यदि जनता का सहयोग मिलना बंद हो जाए तो शोषण व अन्य ज्यादा दिन नहीं चल सकता। असहयोग आंदोलन के माध्यम से गांधीजी ने देशवासियों में निडरता का संचार किया 1920 के असहयोग आंदोलन में यह बातें शामिल थी सरकारी विद्यालय अदालतों और विधान मंडलों का बहिष्कार किया जाए सरकार द्वारा दी गई उपाध्याय को लौटा दिया जाए तथा विदेशी माल का बहिष्कार किया जाए।
सविनय अवज्ञा --- सविनय अवज्ञा को गांधी ने जी ने सबसे ज्यादा प्रभावशाली शस्त बतलाया ।सविनय अवज्ञा का अर्थ है राज्य के कानूनों को मानने और कर आदि देने से इंकार कर देना इस कार्रवाई को एक प्रकार के विद्रोह की संज्ञा दी जा सकती है इसलिए इसे अंतिम सत्र के रूप में ही प्रयोग लाना चाहिए।
सत्याग्रही को किन सिद्धांतों को ग्रहण करना चाहिए
सत्याग्रह करने वालों के लिए गांधीजी ने कठोर नैतिकता संहिता निर्धारित की-----
*सत्याग्रही का उद्देश्य क्योंकि विपक्षी का हृदय बदलना है इसलिए उसे अपनी सूची पर पूरा ध्यान देना चाहिए दुर्भावना क्रोध और असत्य असत्य से बचना चाहिए ।
*निजी लाभ के लिए सत्याग्रह का आश्रय नहीं लेना चाहिए सत्याग्रह तो सार्वजनिक हितों की पूर्ति का साधन है सत्याग्रह बातों में किसी बुराई व अन्याय के निराकरण के लिए किया जाता है ।
*सत्याग्रह और अहिंसा आपस में गए हुए हैं सत्याग्रह में सिर्फ प्रेम और बलिदान की भावना होती है। सत्याग्रह करने पर राज्य द्वारा जो दंड मिले उसे खुशी-खुशी स्वीकार करना चाहिए।
Question-- Describe the theory of historical Materialism of Karl Marx.
कार्ल मार्क्स के ऐतिहासिक भौतिकवाद की व्याख्या कीजिए.
उतर -- ऐतिहासिक भौतिकवाद ---सामाजिक विकास एवं सामाजिक परिवर्तन में द्वंद्वात्मक भौतिकवाद का लागू होना ऐतिहासिक भौतिकवाद या इतिहास की भौतिकवादी अवधारणा कहा जाता है।
ऐतिहासिक भौतिकवाद के सिद्धांत की व्याख्या -- मार्क्सवादी विचारों के आगमन के पहले कोई भी विद्वान वैज्ञानिक रूप से यह व्याख्या नहीं किया कि इतिहास की गतिशील सकती क्या थी ?सामाजिक इतिहास का वास्तविक अर्थ क्या था ? मार्क्स बतलाता है कि सामाजिक विकास किसी देवी शक्ति की इच्छा प्रयास का परिणाम नहीं है ।सामाजिक विकास व्यक्ति और उसकी भौतिक दशा के द्वंदात्मक संबंध का परिणाम है। कार्ल मार्क्स का यह विचार है ही इतिहासिक भौतिकवाद का मूल है। ऐतिहासिक निम्नलिखित तीन सिद्धांतों के आधार पर प्रस्तुत किया जा सकता है:-
1--सर्वप्रथम मार्क्स ने दिखाया है कि मनुष्य एक सामाजिक परिवेश निर्मित करता है और श्रम द्वारा और परिवेश को परिवर्तित करता है अपनी आवश्यकताओं के अनुरूप उसे अनुकूल बनाता है।
2--- द्वितीय-- परिवेश को प्रभावित करने की शक्ति उत्पादक क्या बताएं के विकास के स्तर पर निर्भर करती है। उत्पादन की शक्ति बराबर मनुष्य का श्रम + उत्पादन के यंत्र + प्राकृतिक संसाधन। सामाजिक परिवर्तन का प्रश्न उत्पादन के तरीके के विकास से घनिष्ठता पूर्वक जुड़ा है। भौतिक वस्तुओं के निर्माण के दौरान मनुष्य कुछ संबंधों से बनता है उत्पादन संबंध का स्वभाव विकास के स्तर और उत्पादक शक्ति के स्वभाव द्वारा निर्धारित होता है उत्पादन संबंध दो तत्वों से निर्मित होता है। श्रम और श्रम का यंत्र।
3) तृतीय --उत्पादन की शक्ति और उत्पादन के संबंध मिलकर उत्पादन का तरीका निर्मित करते हैं उत्पादन की शक्ति और उत्पादन का संबंध एक दूसरे को प्रभावित करते हैं और इसके प्रभाव स्वरूप सामाजिक व्यवस्था में क्रांतिकारी परिवर्तन आता है।
उपरोक्त विवरण से स्पष्ट है कि विश्व में ऐसा कोई सर्वशक्तिशाली नहीं है जो इतिहास का निर्माण करें। इतिहास मनुष्य की उद्देश्य पूर्ण क्रिया है ।
आलोचना ---आर्थिक तत्व पर अधिक बल कार्ल मार्क्स का इतिहास की व्याख्या आर्थिक तत्व पर करना सही नहीं है, क्योंकि इतिहास के विकास में आर्थिक तत्वों के अतिरिक्त भौतिक तत्वों सामाजिक वातावरण मानवीय विचारधारा की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
कार्ल मार्क्स ने आर्थिक आधार पर जो आर्थिक विकास के विभिन्न गुणों का वर्णन किया है वह तर्कपूर्ण नहीं है।
कार्ल मार्क्स पर यह कथन है कि जिसके पास आर्थिक शक्ति होती है राजनीतिक शक्ति पर उसी का नियंत्रण होता है या गलत है।
कार्ल मार्क्स के राज्यविहीन समाज की अवधारणा भी गलत है काल्पनिक एवं व्यवहारिक है।
कार्ल मार्क्स ने धर्म को अफीम कहां है जो सर्वथा अनुचित है क्योंकि धर्म विश्व के सर्वोत्तम प्रतिभा संपन्न मनुष्य के चिंतन और अनुभव का परिणाम है।
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