कक्षा 12th प्रधानमंत्री केअधिकार एवं कार्य
भारत की संसदीय शासन व्यवस्था में प्रधानमंत्री की भूमिका सर्वोपरि है संविधान के निर्माता ने प्रधानमंत्री को सबसे अधिक शक्तिशाली एवं सर्वोच्च राजनीतिक नायक बनाया है।
प्रधानमंत्री की नियुक्ति भारतीय संविधान के अनुच्छेद 74(1) में कहा गया है राष्ट्रपति को अपने कार्यों के संपादन करने में सहायता एवं सलाह देने के लिए एक मंत्री परिषद होगी जिसका प्रधान प्रधानमंत्री होगा।
संविधान के 42वे़ संशोधन कानून द्वारा यह कहा गया कि राष्ट्रपति मंत्रिमंडल की सलाह को मानने के लिए बाध्य होगा। संविधान के अनुच्छेद 75 में प्रधानमंत्री की नियुक्ति की बात कही गई इसके अनुसार प्रधानमंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा होगी एवं अन्य मंत्रियों की नियुक्ति भी प्रधानमंत्री की सलाह से राष्ट्रपति द्वारा ही होगी।
कार्यकाल :-लोकसभा का चुनाव 5 वर्ष के लिए होता है अतः समानता प्रधानमंत्री भी 5 वर्ष तक अपने पद पर बना रहता है लेकिन वास्तविकता यह है कि प्रधानमंत्री तब तक अपने पद पर बने रहे रहते हैं जब तक उसे लोकसभा के बहुमत का समर्थन प्राप्त रहता है।
योग्यताएं :-भारतीय संविधान में कहीं भी प्रधानमंत्री की योग्यता का उल्लेख नहीं किया गया है लेकिन इतना तो अवश्य है कि उसे संसद के किसी भी सदन का सदस्य होना चाहिए। उनमे कुछ विशेष गुण एवं चारित्रिक विशेषताएं होनी चाहिए।
प्रधानमंत्री के अधिकार एवं कार्य :-भारतीय संविधान के अनुच्छेद 78 में प्रधानमंत्री के कर्तव्य का वर्णन किया गया है।
इसके अनुसार प्रधानमंत्री के निम्नलिखित कर्तव्य हैं जिनका पालन उन्हें करना पड़ता है।
* प्रशासन एवं कानून संबंधी मंत्री परिषद के सारे निर्णय की जानकारी राष्ट्रपति को देना
* राष्ट्रपति द्वारा मांगी गई सूचना को तैयार करना एवं उसे राष्ट्रपति के पास पहुंचाना*
* राष्ट्रपति के चाहत के अनुसार किसी विषय को मंत्री परिषद के विचार के लिए मंत्री परिषद तक पहुंचाना।
प्रधानमंत्री के अधिकारों कार्य एवं भूमिका को निम्नलिखित शिक्षकों के द्वारा जाना जा सकता है:-
राष्ट्रीय तथा दल का नेता:- लोकसभा में बहुमत प्राप्त राजनीतिक दल का नेता प्रधानमंत्री का पद सुशोभित करता है। प्रधानमंत्री बनने के बाद वह केवल अपने राजनीतिक दल का ही नहीं बल्कि पूरे देश का नेता हो जाता है ।इस संबंध में जाति धर्म भाषा लिंग आदि का कोई महत्व नहीं है ।प्रधानमंत्री होने के नाते व राष्ट्र की एकता में पवित्रता बनाए रखते हैं एवं राष्ट्रीय संकट के समय उचित नेतृत्व प्रदान करता है ।राष्ट्रीय संकट के समय राजनीतिक दृष्टिकोण में अंतर होने के बाद भी सारा राज्य प्रधानमंत्री के साथ खड़ा रहता है ।अनेक राष्ट्रीय समस्याओं के समाधान के एक सच्चे राष्ट्रीय नेता की तरह प्रधानमंत्री राष्ट्रीय सहमति का प्रयास करता है।
लोकसभा तथा मंत्री परिषद का नेता:- प्रधानमंत्री लोकसभा का नेता होता है और अगर यह कहा जाए कि प्रधानमंत्री संसद का नेता होता है तो अतिशयोक्ति नहीं होगी प्रधानमंत्री की सलाह से ही राष्ट्रपति लोकसभा की बैठक बुला सकता है उसे निलंबित कर सकता है अथवा उसे भंग कर सकता है कार्यक्रम बनाने एवं संसद में पेश किए जाने वाले विधायकों को तैयार करने में प्रधानमंत्री की सलाह ली जाती है संसद के नेता होने के नाते कानून बनाने में प्रधानमंत्री विशेष दिलचस्पी लेते हैं
किसी राजनीतिक दल का लोकसभा में स्पष्ट बहुमत होता है तो राष्ट्रपति उस राजनीतिक दल के नेता को मंत्री पद बनाने का आमंत्रण देते हैं प्रधानमंत्री मंत्रिपरिषद का नेता होता है मंत्रिपरषद बनाते समय प्रधानमंत्री निम्नलिखित बातों पर ध्यान रखते हैं अपने दल अथवा गठबंधन दल के वरिष्ठ सदस्यों को मंत्रिपरिषद में शामिल करना मंत्रिपरिषद में सारे राज्य एवं केंद्र शासित राज्यों का उचित प्रतिनिधित्व करना अनुसूचित जाति और पिछड़ी जातियों को मंत्रिपरिषद में स्थान देना युवक नेताओं को मंत्री परिषद में नियुक्त करना एवं भारत में पूंजीवाद सामाजिक व्यवस्था के संरक्षक ओं को मंत्री पद पर देना इत्यादि
राष्ट्रपति का मुख्य सलाहकार:- प्रधानमंत्री राष्ट्रपति का मुख्य सलाहकार होते हैं संविधान के अनुच्छेद 78 के अंतर्गत कहा गया कि प्रधानमंत्री का कर्तव्य मंत्री परिषद एवं मंत्रिमंडल के निर्णय को राष्ट्रपति तक पहुंचाना है राष्ट्रपति किसी भी विषय को मंत्री परिषद के विचारार्थ भेज सकता है।
नियुक्ति संबंधी अधिकार :- राष्ट्रपति प्रधानमंत्री की सलाह से ही राज्यों में लिए राज्यपाल और राजदूत उच्चतम न्यायालय एवं उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के महानान्यवादी ,लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष एवं अन्य सदस्यों ,भारत के नियंत्रक, महालेखा परीक्षक ,वित्त आयोग ,निर्वाचन आयोग ,सेना के तीनों अंक के प्रधानों मंत्री परिषद के सदस्य आदि की नियुक्ति करता है इस प्रकार व्यावहारिक रूप से प्रधानमंत्री सर्वशक्तिमान है।
निष्कर्ष:- प्रधानमंत्री के उपरिक्त अधिकार एवं कार्यों के अध्ययन से इस निष्कर्ष पर पहुंचना पहुंचा जा सकता है कि प्रधानमंत्री के पास असीमित शक्ति है प्रधानमंत्री मंत्री परिषद में बदलाव ला सकता है ।वह नीतियों के निर्धारण में स्वतंत्र है और राष्ट्रपति से लोकसभा भंग करने की सिफारिश कर सकता है राष्ट्रपति को मंत्री परिषद की सलाह के अनुसार काम करना पड़ता है ।मंत्रिमंडल वही करता है जो प्रधानमंत्री चाहता है वस्तुतः भारत का प्रधानमंत्री राष्ट्रपति एवं प्रधानमंत्री दोनों के संविधानिक कार्यों का निर्वहन करता है।
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