गौरी सुभद्रा कुमारी चौहान

 * सुभद्रा कुमारी चौहान के द्वारा रचित कहानी गौरी की चारित्रिक विशेषताओं को दर्शाइए।

:-       गौरी एक चरित्र प्रधान भावनात्मक कहानी है ।गौरी बाबू राधाकृष्णन की इकलौती 19 वर्षीय सुंदर कन्या है। विवाह के योग्य होने पर माता-पिता को उसी विवाह की चिंता होती है।  निश्चायी और निर्भिक गौरी लज्जा और संकोच के कारण अपने माता-पिता से यह नहीं  कह पाती है कि वे उसका विवाह किसी से करवा दे वह हर हाल में  सुखी रहेगी।

 विदुर सीताराम स् स्वभाव से नेक ईमानदार और देश प्रेमी होने पर भी राधा कृष्ण नहीं चाहते हैं कि उनकी बेटी उनके दो बच्चों की  धाय माँ बने। गौरी सीताराम की देशभक्ति और सादगी के विषय में जानकर मन ही मन उन्हें अपना पति मान लेती है। गौरी का सीताराम के देशभक्ति से प्रभावित होना उसके अंतर्मन में छिपे देश प्रेम की भावना को दर्शाता है ।सीताराम के जेल जाने के बाद उनके बच्चों का ध्यान रखना तथा हर महीने बच्चों की कुशल होने का समाचार जेल में भिजवाना उसके उसके चरित्र का विशेषता को दर्शाता है की गोरी त्याग की मूर्ति है। वह धनी तहसीलदार साहब का रिश्ता ठुकरा कर सीताराम और उसके दोनों बच्चों की मां बनती है ।इस तरह वह अपने देशभक्ति को त्याग की भावना का परिचय देकर आदर्श से भारतीय नारी बनी बनती है तथा कहानी का एक सशक्त पात्र के रूप में चित्रित है।

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