कानून बनाने के लिए संसद में ले गए विधायक दो प्रकार के होते हैं। साधारण विधेयक एवं धन विधेयक।
संसद को इन दोनों विधेयको को कानून का रूप देने में अलग-अलग प्रक्रिया अपनानी पड़ती है।
साधारण विधेयक:- संसद की विधाई प्रक्रिया में धन विधेयक अथवा वित्त विधेयक को छोड़कर अन्य किसी प्रकार के विधायक को साधारण विधेयक कहा जाता है।
इस विधायक को पारित होने की प्रक्रिया निम्नलिखित है:-
*संविधान के अनुच्छेद 107(1) के अनुसार धन विधेयक को छोड़कर अन्य कोई भी विधेयक संसद के किसी भी सदन में पुनः स्थापित किया जा सकता है ।लेकिन धन विधायक को केवल लोकसभा में ही रखा जा सकता है।
* किसी भी विधेयक को संसद द्वारा तब तक पारित नहीं समझा जाएगा जब तक इसे संसद के दोनों सदनों द्वारा पारित नहीं किया जाता है ।
*अगर किसी विधेयक को लेकर संसद के दोनों सदनों के बीच विवाद पैदा हो जाता है तो इसका फैसला संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक में बहुमत के आधार पर किया जाता है ।
*संसद द्वारा पारित एक विधेयक को राष्ट्रपति के पास उनके अनुमोदन के लिए भेजा जाता है। राष्ट्रपति उस विधेयक पर पुनर्विचार करने के लिए उसे संसद के पास लौटा सकता है। संसद के दोनों सदनों द्वारा उस पर विचार कर अपना विचार किए बगैर अगर राष्ट्रपति के पास भेजा जाता है तो ऐसी हालत में राष्ट्रपति को अपनी सहमति देनी ही पड़ती है ।राष्ट्रपति की सहमति के बाद विधायक कानून का रूप धारण कर लेता है।
धन विधेयक संबंधी प्रक्रिया:- किसी भी विधेयक को धन विधेयक तभी समझाया जाता है जब भी देख निम्नलिखित सारी बातों अथवा किसी एक बात से संबंध रखता है
* किसी प्रकार का कर लगाना करो का उन्मूलन करना कर को - कर को बढ़ाना कर को नियमित करना अथवा कर में संशोधन करना।
* सरकार द्वारा ऋण की गारंटी प्रदान करना ।
*भारत सरकार की संचित निधि अथवा आकास्मिक निधि की व्यवस्था करना एवं उसे सुरक्षित करना भारत सरकार की संचित निधि से धनराशि काव्य करना किसी को संचित निधि पर भारित घोषित करना या ऐसी रकम को बढ़ाना इत्यादि।
Comments
Post a Comment