सर्वोच्च न्यायालय का कार्य
प्रश्न:- सर्वोच्च न्यायालय के गठन और कार्यों का वर्णन कीजिए
उतर:- भारत की स्वतंत्र होने के पूर्व सन 1935 के भारतीय एक्ट के अनुसार भारत में एक संघ न्यायालय की स्थापना किया गया इसके निर्णय के विरुद्ध इंग्लैंड की पृवी काउंसिल में अपील हो सकती थी ,परंतु भारत के स्वतंत्र होने पर इंग्लैंड से न्याय संबंधी प्रत्येक संबंध विच्छेद कर लिया गया संघ न्यायालय को भंग कर उसके स्थान पर नए संविधान के अनुसार सर्वोच्च न्यायालय की स्थापना की गई। यह न्यायालय इस देश की न्याय संबंधी सबसे बड़ी तथा शक्तिशाली संस्था है संघ न्यायालय के न्यायाधीश सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश नियुक्त कर दिए गए हैं।
प्रारंभिक क्षेत्राधिकार :-सर्वोच्च न्यायालय के सर्वोत्तम क्षेत्राधिकार के अंतर्गत में विषय आते हैं जो सीधे सर्वोच्च न्यायालय में ले जाते हैं अर्थात उन मामलों को किसी भी छोटी अदालत में पहले से जाने की आवश्यकता नहीं है ।प्रारंभिक क्षेत्र अधिकार को पूरा दो उपभागों में बांटा जा सकता है :-1 अनन्य प्रारंभिक क्षेत्राधिकार
2 समवर्ती प्रारंभिक क्षेत्राधिकार
अपील का क्षेत्राधिकार:- संविधान के 113वीं धारा के अनुसार सर्वोच्च न्यायालय निम्नलिखित चार प्रकार के अपील सुन सकता है ।संवैधानिक, संपत्तिजनक ,अपराध संबंधी ,विशेष कार्य के लिए गठित न्यायालय द्वारा निर्मित मुकदमे।
संवैधानिक :-सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट के निर्णय के विरुद्ध इस मामले में अपील सुन सकता है जिसे हाईकोर्ट यह प्रमाणित कर दे कि इसमें संविधान की धारा के सही अर्थ के संबंध में विवाद है अगर हाई कोर्ट किसी मुकदमे को ऐसा ना प्रमाणित करें तो सर्वोच्च न्यायालय स्वयं इस बात का प्रश्न विश्वास हो जाने पर कि इसमें संविधान की व्याख्या के संबंध में कानून का प्रश्न निहित है अपील करने की विशेष विशेष आज्ञा दे सकता है।
* संपत्ति मुकदमे:- दीवानी मुकदमे की सर्वोच्च न्यायालय में इसी दशा में अपील हो सकती है जब राज्य का हाईकोर्ट या प्रमाणित करें कि यह मुकदमा उच्चतर न्यायालय के सम्मुख अपील करने योग्य है या मुकदमे में किसी ऐसी बात पर विवाद है जिसमें सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में होनी चाहिए ।
*अपराध संबंधी:- उच्च न्यायालय के निर्णय के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट में तभी अपील हो सकती है
जब उच्च न्यायालय ने अपील होने पर नीचे के न्यायालय के निर्णय को बदलकर फांसी की सजा दिए
अथवा
हाई कोर्ट अपने अधीन किसी न्यायालय से किसी मुकदमे को अपने यहां मंगा कर अभियुक्त को फांसी की सजा दी हो
अथवा उच्च न्यायालय उसे मुकदमे को उच्चतम न्यायालय के सम्मुख विचार अर्थ भेजने के योग्य समझता हो ।
* सेना संबंध :-सेना संबंधी मामलों को छोड़कर उच्चतम न्यायालय स्ववेक से भारत राज्य क्षेत्र में किसी न्यायालय या अधिकरण द्वारा किसी बात या विषय पर दिए हुए किसी निर्णय आदेश की अपील के लिए विशेष अनुमति दे सकता है
* साथ ही अपने निर्णय के पूर्ण एरोलोकन का भी सुप्रीम कोर्ट को अधिकार है वह उसे वह बदल भी सकता है। सर्वोच्च न्यायालय का यह अधिकार इसके महत्व को बढ़ा देता है और यह इसकी स्वतंत्रता का बोधक है।
परामर्शीय क्षेत्राधिकार :- जिस प्रकार इंग्लैंड की टीवी काउंसिल तथा कनाडा के सर्वोच्च न्यायालय को परामर्श देने का अधिकार है ठीक उसी प्रकार भारतीय सर्वोच्च न्यायालय को भी परामर्शीय अधिकारी प्राप्त है ।संविधान के अनुच्छेद 143 के अनुसार राष्ट्रपति जब चाहे किसी भी महत्वपूर्ण संविधानिक मामले समझौते संधि या सार्वजनिक महत्व के प्रश्न से संबंध किसी भी विषय को सर्वोच्च न्यायालय के समाज विचार अर्थ रख सकता है तथा सर्वोच्च न्यायालय अपनी राय राष्ट्रपति को दे सकता है ।
आवृत्ति संबंधित संबंधी क्षेत्राधिकार:- चुँकी सर्वोच्च न्यायालय एक अभिलेख न्यायालय है इसलिए इसके निर्णय को कानूनी मान्यता प्राप्त है इसके अभिलेख सभी जगह साक्षी के रूप में प्रस्तुत किए जाते है।
अन्य अधिकारों का वर्णन निम्नलिखित रूप में कर सकते हैं
भारतीय सर्वोच्च न्यायालय नागरिकों के मौलिक अधिकारों का अभिरक्षक है संविधान के अनुच्छेद 321 में सर्वोच्च न्यायालय को विशेष रूप से उत्तरदाई घोषित किया गया है की मौलिक अधिकारों को लागू करने के लिए समुचित कार्यवाही करें।
लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष अध्यक्ष तथा अन्य सदस्य तब तक अपने पद से नहीं हटाया जा सकते हैं जब तक सर्वोच्च न्यायालय राष्ट्रपति को ऐसा करने के लिए परामर्श ना दें भारतीय सर्वोच्च न्यायालय को न्यायिक पूर्व अवलोकन का भी अधिकार प्राप्त है न्यायिक पूर्व विलोकन की शक्ति का आधार संविधान की संरचना के सिद्धांत पर आधारित है सर्वोच्च न्यायालय अपने कर्मचारियों तथा पदाधिकारी पर नियंत्रण रखता है और इसकी नियुक्ति भी करता है लेकिन नियुक्ति के लिए राष्ट्रपति की स्वीकृति प्राप्त करना आवश्यक है।
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