Class 12 history The nature of the colonial dominance :formal and informal Empires
Q1- भारत में अनौद्योगीकरण के क्या-क कारण थे ?भारतीय अर्थव्यवस्था पर इसके प्रभाव की चर्चा कीजिए?
Ans :भारतीय राष्ट्रीय इतिहासकारों ने ने भारत में ब्रिटिश शासन काल के प्रारंभिक चरण में हुए औद्योगिक औद्योगिक पतन को अनौद्योगिककरण का नाम दिया है।
काल में भारतीय उद्योग के विनाश के निम्नलिखित कारण थे
* औधोगिक क्रांति ने इंग्लैंड में एक शक्तिशाली और संगठित पूंजीपति वर्ग को जन्म दिया तो चाहते थे कि भारत का द्वार सभी व्यापारियों के लिए खुले ।1813 ईस्वी में कंपनी ने अपने व्यापार का अधिकार खो दिया और अधिक से अधिक ब्रिटिश व्यापारी भारत पहुंचने लगे ।पूरा भारतीय बाजार ब्रिटेन की बनी वस्तुओं से भर गया और भारतीय उद्योगपति ब्रिटिश वस्तुओं के समक्ष अपने अस्तित्व हने लगे इसके परिणाम उद्योग के लिए और अहितकर थे।त्रं
*सस्ती ब्रिटिश ब्रिटिश वस्तुओं का मुकाबला ना कर पाने की स्थिति में भारतीय औद्योगिक वस्तुओं से उनका बाजार छिन गया और इसका प्रभाव उनके उत्पादन पर पड़ा।
* ब्रिटिश बाजार में भारतीय वस्तुओं पर बहुत अधिक कर लगाया जाता था उसके कारण उन्हें उन्होंने विदेशी बाजार भी खो दिया। 1824 ईसवी में भारतीय सूती वस्त्र को लगभग 62 / कर देना पड़ता था केवल भारतीय मखमल वस्त्र पर लगभग 33% तथा भारतीय चीनी को इसके मूल्य से 3 गुना कर इंग्लैंड में देना पड़ता था ।संभवतः भारतीय उद्योग का पतन शुरू हो गया।
*ब्रिटिश ब्रिटिश उपनिवेश नीति ने भारत को ब्रिटिश वस्तुओं का खुला बाजार और कच्चे मालों को पाने का केंद्र बना दिया।
*अंग्रेजी शासन के चलते भारत के देशी रजवाड़े समाप्त हो गए जो कि भारतीय वस्तुओं के सबसे बड़े खरीदार एवं संरक्षक थे। इसका असर भारतीय हस्तशिल्प पर पड़ा और वह पतन के कगार पर पहुंचे।
अनौद्योगिकरण का भारतीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव:-
* शिल्प उद्योग के पतन के कारण अधिकाधिक कारीगर अपना पुश्तैनी कारोबार छोड़ने लगे कारीगर शहरों में मजदूरी करने लगे ।
*अनौद्धोगीकरण ने भारत को निर्यातक से आयतक की श्रेणी में लाकर खड़ा कर दिया। भारत अब केवल ब्रिटिश उद्योग के लिए कच्चे माल को जुगाड़ करने का केंद्र बन गया।
* अनौद्योगिकरण का प्रभाव भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ा। भारतीय अर्थव्यवस्था कृषि और उद्योग के स्थानीय समन्वय पर निर्भर थी। ग्रामीण उद्योग के पतन से इस समय को नुकसान पहुंचा।
* भारतीय बुनकरों पर अत्याचार कर उन्हें केवल अंग्रेजों के लिए उत्पादन करने को बाध्य किया जाने लगा इससे त्रस्त होकर हजारों बंद करो ने या तो अपने घर छोड़ दिए अपने अंगूठे काट लिए ताकि इन अत्याचारों से बचा जा सके।
इस प्रकार ब्रिटिश आर्थिक व औपनिवेशिक नीतियों से भारत में और अनौद्योगीकरण की स्थिति उत्पन्न हो गई।
2) भारत में रेल मार्ग के स्थापना के उद्देश्य से प्रभाव का वर्णन कीजिए ।
उतर-- विश्व के विभिन्न देशों की आर्थिक प्रगति में रेलवे का भारी योगदान रहा यातायात की सुविधा से बिना भारी वस्तुएं एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाना बड़े पैमाने पर उत्पादित वस्तुओं का व्यापार संभव नहीं था। विश्व में प्रथम रेल मार्ग 1830 खुला लेकिन भारत में 1848 निर्माण की योजना आया।
रेल की स्थापना के उद्देश्य- लॉर्ड हार्डिंग ने साम्राज्य की सुरक्षा के लिए सेना को एक स्थान से दूसरे स्थान पर भेजने के लिए कंपनी के संचालकों को भारत में रेल निर्माण को प्रशासन देने हेतु लिखा था । रेलवे के निर्माण से भारत के कच्चे माल का निर्यात बढ़ सकता था तथा इंग्लैंड में उत्पादित माल को बड़ी मात्रा में भारत भेजा जा सकता था इस प्रकार रेलों का निर्माण भारत के अर्थव्यवस्था को इंग्लैंड की अर्थव्यवस्था के अधीन बनाए रखने का प्रयास मात्र थी। लॉर्ड डलहौजी द्वारा किया गया रेल निर्माण कार्य एक विशेष पद्धति पर आधारित था जिसे गारंटी पद्धति कहा जाता है, इस पद्धति के अंतर्गत ब्रिटिश निजी कंपनियों को सरकारी देखरेख में रेल निर्माण का कार्य सौंपा गया ।इन कंपनियों को उनकी पूंजी पर ब्याज का 4:30 से 5% लाभ की गई । कभी यदि निर्धारित लाभ से कम होता होता था तो सरकार की ओर से सरकार को खरीदने का अधिकार दिया गया गया।
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