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 उपनिवेशवाद और साम्राज्यवाद पर हाब्सन -लेनिन सिद्धांत का वर्णन कीजिए।

उतर--समाजवादी सिद्धांतों को दो श्रेणियों में बांटा जा सकता है साम्राज्यवाद के आर्थिक सिद्धांत के समर्थकों में यह हाब्सन रोजा ,लक्जमबर्ग ,और लेनिन का नाम आता है ।

साम्राज्यवाद के संबंध में दिए गए भाषण तथा लेनिन दिए गए आर्थिक वक्ताओं के पीछे एक खास राजनीतिक एजेंडा था।

इस व्याख्या के पीछे हाब्सन का उद्देश्य ब्रिटिश जनता को वित्तीय पूंजीवाद के बढ़ते प्रभाव के खतरों से आगाह करना था। ब्रिटेन के शासन तंत्र में धनिक तंत्र के बढ़ते प्रभाव तथा सरकार की वित्तीय पूंजी वादियों को संतुष्ट करने के प्रयासों के प्रति सचेत करना था ।उन्होंने अपनी पुस्तक साम्राज्यवाद में साम्राज्यवाद को पूंजीवादी व्यवस्था का परिणाम मानते थे। उनका मानना था कि क्योंकि पूंजीवादी राष्ट्रों में मजदूरों को कम वेतन दिया जाता है ।अतः उनकी क्रय क्षमता कम थी ।हाब्सन का कहना था साम्राज्यवाद के पीछे प्रभावी उद्देश्य प्रत्येक साम्राज्यवादी शासन के भीतर और वित्तीय वर्गों द्वारा बाजारों और लाभकारी निवेश की मांग थी। उनके अनुसार सक्ता, गौरव, प्रतिष्ठा आदि को स्थापित करना उपनिवेश के देशश जनता को सभ्य बनाना आदि उद्देश्य गौण थे। 

        लेनिन ने अपनी पुस्तक "इंपिरियलिज्म," "द हाईएस्ट स्टेज ऑफ कैपिटलिजम"तर्क दिया है कि क्योंकि विकसित पूंजीवादी देशों में घरेलू निवेश लाभ देने की सीमा तक पहुंच गया था ।इसलिए यह देश पिछड़े हुए देशों में अपनी पूंजी का निवेश करता था । लेनिन का मानना था कि कि यूरोपीय देशों के मध्य बाढ़ रहे प्रतिस्पर्धा के कारण प्रथम विश्व युद्ध हुआ ,इस प्रतिस्पद्धा का प्रमुख कारण साम्राज्यवादी स्वार्थ था।

लेनिन राजनीतिक स्वार्थ के वशीभूत होकर पूंजीवादी स्वार्थों की पोल खोलना चाहते थे ।वे चाहते थे कि रूस के लोग प्रथम विश्व युद्ध में भाग ना लें तथा इस उद्देश्य उन्होंने साम्राज्यवाद की व्याख्या की ।

लेनिन के अनुसार साम्राज्यवादी राष्ट्रों का अधिकतम शोषण करते थे और इसके लिए उन्हें ऐसा करते रहने तथा निवेशकों से धन कच्चे माल और मजदूरों की आकृति को बनाए रखने के लिए कुछ लोगों को अफसर के रूप में नियुक्त करना पड़ता था जो अधिकतर उनके देश के होते थे अफसरो या गवर्नरो को बहुत से अधिकार प्रदान किए जाते।

क्या हॉब्सन - लेनिन केसिद्धातं में वास्तविकता है- फिल्ड  हाउस  में साम्राज्यवाद की उत्पत्ति के संबंध में विभिन्न विचारों का अध्ययन किया और उसने कुछ प्रश्न उठाए जो निम्नलिखित है:-

1) राजनीतिक पैंम्प्लेट :- अनेक लोगों का मानना है कि हाब्सन और लेनिन पेशे से इतिहासकार नहीं थे ,इनके द्वारा जो सिद्धांत दिया गया और राजनीतिक पैंम्पलेट के अतिरिक्त कुछ नहीं है। प्रत्येक ने तत्कालीन राजनीतिक उद्देश्य  से लिखा था। हाब्सन का तात्कालिक उद्देश्य दक्षिण अफ्रीका में बोआर से सुरक्षा था।  युद्ध में अफ्रीका के बाद अंग्रेज उपनिवेशवादो से लड़ रहे थे। लेकन  के संबंध में कहा जाता है कि उसका उद्देश्य की 2nd international  की  समाप्ति की व्याख्या करना था तथा सेकंड इंटरनेशनल साभ्वादियों का अंतरराष्ट्रीय संगठन था जिसके स्थापना 1889 में हुई थी।

2) सिद्धांतों में गंभीर अंतर कुछ विद्वानों ने दोनों के सिद्धांतों के बीच महत्वपूर्ण अंतर देखा है लेनी ने आर्थिक एक अधिकार पर जोड़ दिया है जो साम्राज्यवाद के विस्तार की ताकत है जबकि हॉब्सन इस बारे में कुछ भी नहीं कहते हैं।


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