Question :- Briefly discussed the land revenue system of the English east india company in India. 

ईस्ट इंडिया कंपनी के द्वारा भारत में किए गए भू राजस्व व्यवस्था में सुधार का संक्षिप्त विवरण दीजिए

उतर:-   शुरू से ईस्ट इंडिया कंपनी से निर्धारित भूमि राजस्व व्यवस्था में परिवर्तन करना प्रारंभ किया जब कंपनी की आर्थिक स्थिति बहुत खराब हो गई तो उसने भूमि राजस्व में अनेक सुधार किए जिसका संक्षिप्त वर्णन निम्नलिखित है:-

1) वारेन हेस्टिंग्स के भू राजस्व संबंधी प्रयोग:- क्लाइव और उसके उत्तराधिकारी अस्थाई भूमि राजस्व की वसूली कंपनी भारतीय अधिकारियों के द्वारा करते थे जो बंगाल के नवाब के अंतर्गत काम करते थे ।  हेस्टिंग ने भु राजस्व वसूली की नई व्यवस्था शुरू की।

इजरादारी या पंचशाला व्यवस्था सन 1772 इसी में बंगाल और बिहार में लागू की गई इस व्यवस्था के अंतर्गत भू राजस्व वसूली के अधिकार की नीलामी होती थी जो व्यक्ति अधिकतम बोली बोलना था उसे भू राजस्व सभी का अधिकार मिलता था।

सन 1777 में नई व्यवस्था लागू हुई जिसके अंतर्गत भूमि पर अधिकतम बोली बोलने वाले को नहीं अपितु परंपरागत जमीदार को भूमि दी जाती थी वारेन हेस्टिंग की कोई भी नीति बहुत दिनों तक जारी नहीं रही।

2) लॉर्ड कॉनवालिस के शासन में भू राजस्व व्यवस्था:- लॉर्ड कॉर्नवाल  गवर्नर जनरल था तो उसने सन 1793 में भू राजस्व के स्थाई व्यवस्था लागू की इस व्यवस्था के अंतर्गत जमींदार से भू राजस्व के भुगतान के बारे में जो समझौता होता था उसे जिम्मेदारी व्यवस्था कहते थे व्यवस्था के अंतर्गत राजस्व वसूली करने वाला व्यक्ति भूमिका स्वामी होता था जमीदार पर भूमि पर पुश्तैनी अधिकार होता था जमीदार एक निर्धारित तारीख को सूर्यास्त से पूर्व निर्धारित लगान कंपनी को देनी पड़ती थी यदि वह ऐसा नहीं कर पाता था तो भूमि संस्था अधिकार समाप्त हो जाता था यह व्यवस्था करे बंगाल की 1793 बिहार और बाद में उड़ीसा में लागू की ।

रैयतवाड़ी रैयतवाड़ी :-व्यवस्था मद्रास प्रेसीडेंसी के गवर्नर थॉमस मुनरो ने रैयतवाड़ी व्यवस्था दक्षिण भारत में लागू किया इस व्यवस्था द्वारा कंपनी ने प्रत्यक्ष किसानों से भू राजस्व की वसूली की व्यवस्था की अस्थाई व्यवस्था में भूमि के राजस्व की वसूली जमीदारों से होती थी राजस्व का निर्धारण भूमि की उर्वरता और फसल के स्वरूप द्वारा निर्धारित होता था स्थाई बंदोबस्त में लगा निर्धारण के समय इस बात का ख्याल नहीं किया जाता था जिस प्रकार की राशि होती थी इसी प्रकार बंदोबस्त में राजस्व की राशि निश्चित नहीं होती थी रेवाड़ी बंदोबस्त प्रत्येक 32 वर्ष बाद राजस्व का  पुनः निर्धारण होता था।

महालवाड़ी व्यवस्था :-उत्तर भारत के कुछ भागों में फॉल्ट मैकेंजी ने 1822 में महालवाड़ी व्यवस्था लागू किया इस व्यवस्था के अंतर्गत लगन का बंदोबस्त व्यक्ति के बदले गांव या गांव के महल के साथ किया जाता था महालवाड़ी बंदोबस्त कंपनी ने पंजाब और उत्तर प्रदेश में लागू किया इस व्यवस्था में राजस्व बंदोबस्त निजी व्यक्ति के बदले गांव से होता था।

इस प्रकार हम देखते हैं ईस्ट इंडिया कंपनी के अंतर्गत भारत में कई तरह के भूमि राजस्व व्यवस्था की गई जो समय-समय पर बदली जाती थी।

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