कलाकार की व्यक्तिगत ईमानदारी के आधार पर यशराज का चरित्र चित्रण कीजिए
उतर :-निबंध के आधार पर यशराज के विभिन्न चरित्र को हम देख सकते हैं:-
* शिक्षित तथा बेरोजगार :-प्रस्तुत निबंध कलाकार की व्यक्तिगत ईमानदारी में यशराज का चरित्र एक अच्छे वक्ता और शिक्षित समझदार युवक के रूप में हमारे सामने प्रस्तुत किया गया है। यशराज काफी पढ़ा लिखा है लेकिन शिक्षित होकर भी बेरोजगार है जो कि भारतवर्ष की सबसे बड़ी समस्या नजर आती है ।
स्पष्टवादी :- यशराज अपने कथनों में वेवाक है। वह किसी भी बात को समझ कर स्पष्ट शब्दों में बेबाक बोलता है ।वह किसी की बडा़ई झूठ -सच के साथ नहीं करता है। वह सच्चाई को बड़े स्पष्ट शब्दों में कहता है ।निबंध में यशराज खुद ही एक ऐसा देखने को हर जगह मिल जाता है। लेखक जैसे ही वसुधा के लिए अपनी लिखी डायरी को खत्म करता है ।यमराज तुरंत ही बोल पड़ता है कि यह डायरी बिलकुल फ्रॉड है ,इस बात से उसकी वेबाकी और स्पष्ट बादिता का पता चलता है।
तार्किकता तथादार्शनिक स्वभाव वाला:- यशराज लेखक से बातचीत करते समय काफी तर्क के साथ बात करता दिखाई पड़ता है ।वह ईमानदारी जैसे शब्दों को अपने तर्कों के माध्यम से परिभाषित करता और कहता है कि व्यक्तिगत ईमानदारी का क्या अर्थ है? अधिक से अधिक वह अभिव्यक्ति की ईमानदारी है इससे अधिक कुछ नहीं है ।तुममे तो अभिव्यक्ति की ईमानदारी भी नहीं है। यशराज अपनी बातों को लेखक के सामने दार्शनिक व्यक्ति की भांति रखता है ।जिंदगी की परिभाषा देते समय व्यक्तिगत ईमानदारी को परिभाषित करते हुए या कविता को कविता की असली पहचान करते हुए बिल्कुल दार्शनिक स्वभाव वाला लगता है।
जिज्ञासु प्रवृत्ति:- यशराज अपनी पूरी भूमिका में जिज्ञासु प्रवृत्ति वाला है वह विज्ञान का व्यक्ति होते हुए भी साहित्य से नाता जोड़ना और उसके मर्म को समझना चाहता है और विज्ञान के साथ-साथ साहित्य की कविता और कहानी पर भी बात करना उन पर अपनी दो-चार टिपाणियाँ करने की क्षमता रखता है। जैसा कि उसके कथन से स्पष्ट है -"नई कविता की भी एक लीक पड़ गई है ।वह भी एक ढर्रा है और ढरा में सब कुछ खपाया जा सकता है ।एक बार सिर्फ विधान पर अधिकार हो जाए की बस -----"इस वाक्य से उसके साहित्यिक गतिविधियों का भी पता चलता है ।
इस प्रकार हम पाते हैं कि प्रस्तुत निबंध में ऐतराज़ का चरित्र मानसिकता वाला जिज्ञासु दार्शनिक स्वभाव वाला शिक्षित और तार्किक बुद्धि वाला है।
2) "कलाकार की व्यक्तिगत ईमानदारी" निबंध के आधार पर लेखक का चरित्र चित्रण कीजिए।
उतर -- कलाकार की व्यक्तिगत ईमानदारी निबंध के आधार पर लेखक अर्थात गजानन माधव मुक्तिबोध के निम्नलिखित चरित्र चित्रण देख सकते हैं :-
ईमानदार :-लेखक द्वारा लिखे गए निबंध का शीर्षक" कलाकार की व्यक्तिगत ईमानदारी- एक" शीर्षक से ही पता चलता है कि लेखक ने अपने डायरी में अपनी ईमानदारी का परिचय दिया है जिसे उसने एक लिखित रूप देकर लोगों के सामने प्रस्तुत करना चाहा। वह यशराज के प्रतिक्रिया करने पर जवाब देता है कि- तुम भले ही फ्रॉड कह लो ,इसमें व्यक्तिगत ईमानदारी जरूर है ।"डायरी में मेरी व्यक्तिगत ईमानदारी का सबूत है" इस वाक्य से लेखक की व्यक्तिगत ईमानदारी उजागर होती है ऐसा हम कह सकते हैं ।
विद्या- व्यसनी :- लेखक व्यक्तिगत रूप से अत्यधिक विद्या वैष्णवी है वह स्वाध्याय के ही द्वारा इस मुकाम पर पहुंचा है कि कुछ लिख पढ़ सके वसुधा पत्रिका के लिए उसकी लिखी गई ताजी- ताजी जाए। डायरी लेखन के विद्या- व्यसनी होने का प्रमाण है। वैसे भी लेखक ने अपने इस निबंध में अपने व्यक्तिगत ईमानदारी की हुई दिखाने का प्रयास किया है।
सहनशील:- लेखक अपने पूरे निबंध में सहनशील, सहिष्णु और धीर व्यक्तित्व वाला है। वह अपने या अपने लिखित व्यक्तिगत ईमानदारी पर डायरी पर किए जा रहे कमेंट के प्रति बहुत ही सहनशील है वह उसके प्रति उत्तर में कुछ भी नहीं कहता है बल्कि उसके लिए सुधारात्मक रवैया अपनाने की कोशिश करता है।
साहित्य से लगाव
जीवन की गहरी समझ
विचारों पर अमल करने वाला
Comments
Post a Comment