Political science 12

1) भारत की संसद में राज्यसभा और लोकसभा के संबंधों का वर्णन कीजिए ।

                            अथवा 

भारत की संसद में दोनों सदनों के संबंधों का वर्णन कीजिए।


उतर:-   संविधान के अनुसार राज्यसभा और लोकसभा दोनों संसद के ही अंग है ।लोकसभा को निम्न सदन एवं राज्यसभा को उच्च सदन कहते हैं। लोकसभा समस्त भारत की जनता का प्रतिनिधित्व करती है और राज्यसभा संघ की इकाइयों का प्रतिनिधित्व करती है।

 लोकसभा की शक्तियां राज्यसभा की तुलना में अधिक होती है लोकसभा और राज्यसभा में निम्नलिखित समानताएं देखी जाती है:-

* दोनों सदनों और राष्ट्रपति से मिलकर संसद का निर्माण होता है।

* दोनों सदनों के सदस्य राष्ट्रपति के निर्वाचन में भाग लेते हैं।

* दोनों सदनों की सहमति से संशोधन हो सकता है।

* न्यायाधीशों को पदयुक्त करने में दोनों सदनों को समान अधिकार प्राप्त है।

* राष्ट्रपति के खिलाफ महाभियोग का प्रस्ताव दोनों सदनों में पेश हो सकता है।

* साधारण विधायक दोनों सदनों में पेश हो सकते हैं।

लोकसभा राज्यसभा के अंतर के संबंधों को निम्न बिंदुओं द्वारा देखा जा सकता है:-

1)साधारण बिल:- साधारण बिल लोकसभा या राज्यसभा दोनों में उठाया जा सकते हैं तथा दोनों सदनों द्वारा पारित होने पर इसी राष्ट्रपति के पास हस्ताक्षर के लिए भेजा जाता है यदि विधायक पर दोनों सदनों में मतभेद हो तो संयुक्त अधिवेशन के द्वारा विधायक को पारित कराया जाता है यदि राज्यसभा किसी साधारण विधेयक को 6 माह से अधिक समय तक रोक देती है तो विधायक राज्यसभा द्वारा पारित माना जाता है।

२) धन विधेयक:- राष्ट्रीय के धन पर लोकसभा का ही वर्ष होता है धन संबंधी विधेयक सर्वप्रथम लोकसभा में ही उठाए जाते हैं लोकसभा द्वारा पारित होने के बाद वह राज्यसभा में पेश किया जाता है यदि राज्यसभा 14 दिन में उसे पर विचार ना करें तो वह दोनों सदनों द्वारा पारित समझ जाता है यदि उसमें संशोधन करके राज्यसभा लोकसभा में भेज दे और लोकसभा को स्वीकार न हो तो वह विधायक सांसद द्वारा पारित समझा जाता है।

3) कार्यपालिका पर नियंत्रण :- व्यवहार में कार्यपालिका पर रोक लोकसभा द्वारा ही लगाया जाता है संसदीय प्रणाली में मंत्रिमंडल लोकसभा के प्रति उत्तरदाई होता है राज्यसभा के सदस्य मंत्री परिषद के सदस्य हो सकते हैं वह मंत्रियों से प्रश्न पूछ सकते हैं उनकी आलोचना कर सकते हैं पर राज्यसभा मंत्रिमंडल के विरुद्ध अविश्वास का प्रस्ताव नहीं ला सकती पर लोकसभा मंत्रिमंडल के विरुद्ध अविश्वास का प्रस्ताव ला सकती है और उसे अपदस्थ भी कर सकती है।

3) संविधान में संशोधन :- संविधान संशोधन के क्षेत्र में लोकसभा और राज्यसभा दोनों को समान अधिकार प्राप्त है संविधान संशोधन प्रस्ताव तभी स्वीकृत समझा जाता है जब दोनों सदन अलग-अलग दो तिहाई बहुमत से पारित कर दें यदि संशोधन प्राप्त प्रस्ताव पर दोनों सदनों के बीच असहमति हो तो प्रस्ताव गिर जाता है।

अन्य अधिकार:-* राष्ट्रपति एवं उपराष्ट्रपति के चुनाव में दोनों सदन हिस्सा लेते हैं ।

*राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति को पड़युक्त करने के लिए दोनों सदन महाभियोग लगा सकते हैं।

* उच्च न्यायालय तथा सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों को भी महाभियोग द्वारा प्रयुक्त किया जा सकता है।

* संकटकाल की घोषणा में दोनों सदनों द्वारा स्वीकृति आवश्यक है।

राज्यसभा का विशेष अधिकार :- कुछ मामले में राज्यसभा को विशेष अधिकार प्राप्त है जो लोकसभा के पास नहीं है जैसे:- 

*राज्यसभा अपने दो तिहाई बहुमत से राज्य सूची के किसी भी मामले पर कानून बनाने की घोषणा कर सकता है 

*अपने दो तिहाई बहुमत से नवीन अखिल भारतीय सेवाओं की स्थापना के लिए प्रस्ताव पास कर सकती है ।

 उपसंहार :-उपर्युक्त विवेचन से स्पष्ट है कि राज्यसभा के पास लोकसभा की तुलना में काम शक्तियां प्राप्त है संसदीय व्यवस्था में अंतिम निर्णय की शक्ति लोकसभा के पास ही है संविधान निर्माता निर्माता ने राज्यसभा को लोकसभा का प्रतियोगी नहीं अपितु सहयोगी सदन बनाया है दोनों के आपसी सहयोग से ही संसदीय व्यवस्था सुचारू रूप से चलाया जा सकता है।


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