कक्षा 12 हिन्दी( भाई -बहन)

1)  भाई बहन कहानी के आधार पर सुंदर देई का चरित्र चित्रण कीजिए

उतर:-भाई बहन कहानी के आधार पर सुंदर देई के निम्नलिखित चरित्र को देखा जा सकता है:-

प्रसन्नमना:- सुंदर एक प्रसन्न मन बालिका है ।वह अपने पिताजी के साथ प्रसन्नमन  से नाटी इमली का मेला देखने जाती है वह चंचल स्वभाव की बालिका है ।कहानी में उसके मेला देखने का उत्साह देखा जा सकता है।

आज्ञाकारनी बालिका :- सुंदरिया एक आज्ञाकारनी बालिका है वह अपनी मां की बताई गई बात का हमेशा ध्यान रखती है कि वह उम्र में छोटी है इसलिए उसे ही चीजों में कामती हिस्सा लेना चाहिए इसका पता कहानी की एक वाक्य से चलता है" तुम्हें सब चीज में भैया से कमती हिस्सा लेना चाहिए"।

संतोषी बालिका:- सुंदरी अपने आप में एक संतोष करने वाली बालिका है उसे जो भी मिलता है वह उसी में संतोष करना जानती है मिला देखने के लिए उसे एक आना मिलता है और इस एक आने को लेकर मेला देखने को चली जाती है और यह विश्वास रखती है कि उतने ही पैसे में मिले के सभी चीजों को मोल खरीद पाएगी।

सद्गुणी महिला :-सुंदरिया बड़ी होकर अपने ससुराल को चली जाती वहां जाकर एक अच्छी ग्रहणी की भांति अपने सास ससुर पति की सेवा करती है वह एक आदर्श बहू के सारे गुण को अपने में समाहित कर कर रखती है।

 इस प्रकार छोटी सी बालिका सुंदरिया में सद्गुणी संतोषी, समझदार, आज्ञाकारनी और आदर्श ग्रह के सारे गुण विद्वान हैं।

2)  बंग महिला द्वारा रचित कहानी भाई बहन की प्रासंगिकता व उद्देश्य लिखिए।

भाई बहन बंग महिला रचित स्वदेश प्रेम और बाल मनोविज्ञान को दर्शाती कहानी है प्रस्तुत कहानी में बच्चों के माध्यम से दर्शाया गया है कि अपने देश का निर्माण हम खुद ही कर सकते हैं कोई दूसरा नहीं कर सकता उसे उत्कर्ष और उत्कर्ष पर हम भी खड़ा कर सकते हैं इसकी समृद्धि और सफलता हमारे यहां तो में है सुंदर और सब दूध सगे भाई बहन अपनी अपनी अलग-अलग इच्छाएं हैं एक को विदेशी चीज अच्छी लगती है जबकि एक को स्वदेशी निर्मित वस्तुएं अच्छी लगती है सब की सफलता अर्थात अधिक पैसे होने से उसकी इच्छा बड़ी हुई है उसे अपने देश की वस्तुएं पसंद नहीं है जबकि सुंदर उससे छोटा है और समझदार उसको यह पता है कि कम पैसों में अधिक उपयोगी और मूल्यवान वस्तु खरीदी ली जाए उसको अधिक खर्च और कम खर्च का मूल्य भी मालूम है इतना ही नहीं इसका कारण यह है कि वह छोटी है और मां ने बताया है कि सब तो बड़ा है इसलिए भी उसे कम पैसे खर्च करने चाहिए काम समान लेने चाहिए और हर चीज वस्तु में काम ही इच्छा रखनी चाहिए यही सब आज के भी दौर में हो रहा है हर तरफ बेटी बेटी का बड़े छोटे का फर्क साफ नजर आ रहा है इस कहानी की प्रासंगिकता यहां पर आकर जुड़ जाती है कहानी का प्रकाशन वर्ष सन 1908 ईस्वी में है तत्कालीन समय राजनीतिक दृष्टि से देखा जाए तो गांधी बात का प्रभाव भी इसमें हिसाब झलकता है उसे समय विदेशी चीजों का बहिष्कार बहुत तेजी से हो रहा था कहानी में ही बात सब के रेलगाड़ी को लेकर देखा जा सकता है वहां सब द्वारा विदेशी रेलगाड़ी खरीद कर विदेशी कारीगर को लाभ पहुंचाने की बात श्री राम जी के द्वारा कही गई है साथी सुंदर द्वारा मिट्टी का खिलौना खरीदने पर उसे अच्छा बताया गया है तत्कालीन समय में विदेशी वस्तुओं का स्वीकार बहुत तेजी से चल रहा है आज भी इन चीजों की खपत और खरीदारी का ज्यादा से ज्यादा बोल वाला हो गया है हर व्यक्ति विदेशी वस्तु का उपयोग करना चाहता है उसे देसी वस्तुओं को रखने से गिरना हो गई है उसे अंदर कुछ भाव जैसे पैदा हो गया हो यदि किसी ने स्वदेशी वस्तु रखवाली है तो विदेशी रखने वाले उसे कुछ निगाह से देखते हैं यही कहानी का उद्देश्य भी है कि वह स्वदेश निर्मित वस्तुओं को अपने और अपने देश की श्री विधि में योगदान करें इससे हमारे देश में आर्थिक मजबूती आएगी और हमें अपने आप पर गर्व भी महसूस होगा यही संदेश प्रेम कहानी में कहानीकार ने छोटे बच्चों के माध्यम से दर्शाया है।


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