हिंदी साहित्य का इतिहास कक्षा 12

Q) छायावाद युग की प्रमुख विशेषताओं की चर्चा कीजिए ans:-  छायावाद की सामान्य प्रवृत्तियां:-

महादेवी  वर्मा के के अनुसार "छायावाद स्वच्छंद छंदों में चित्रित मानव अनुभूतियों का नाम है" ।

छायावाद की प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित है :- 

1)व्यक्तिवाद की प्रधानता:-  अहंभाव छायावादी काव्य की प्रमुख विशेषता है ।छायावादी कविता मुख्ता व्यक्तिवाद की कविता है प्रसाद के "आंसू" तथा पंत जी के "उच्छवास" में व्यक्तिवाद सुख-दुख के अभिव्यक्ति खुलकर प्रकाशित होती है।

 "जो घनीभूत पीड़ा थी

 मस्तक में स्मृति सी छाई।

 दूदिर्न  में आंसू बनकर

 वह आज बरसाने आई।।


 २)प्रकृति का मानवीयकरण :- छायावादी काव्य में प्रकृति पर चेतना का आरोप किया गया है। प्रसाद पंत निराला महादेवी वर्म प्रकृति का नारी रूप में चित्रण किया है।सौंदर्य एवं प्रेम की अभिव्यक्ति की है।

 "जैसे पगली री ले संभाल यह कैसे छूट पड़ा तेरा आंचल।

 देख बिखरती है मणीराजी उठा अरी  बेसुध चंचल।"--- प्रसाद

" बोल तेरे बाल जाल में कैसे उलझा दूँ लोचन।"-- सुमित्रानंदन पंत

३)नारी सौंदर्य तथा प्रेम का चित्रण:- छायावादी कवियों का नारी सौंदर्य के प्रति विशेष आकर्षण रहा परंतु इसमें रीतिकालीन कवियों की तरह स्थूलता एवं नग्नता नहीं मिलती है।----

 नील परिधान बीच सुकुमार खुल रह मृदुल अधखुला अंग। खिला हो जो बिजली का फूल मेघवन बीच गुलाबी रंग--- प्रसाद

 ४)रहस्यवाद:- इस काव्य में प्रकृति पर चेतना का आरोप लगाया गया है यदि निराला ने तत्वज्ञान के कारण इसे अपनाया तो पद के प्राकृतिक सौंदर्य से अभिवृत्ति होकर महादेवी वर्म अतिशय प्रेम और वेदना के कारण इस तन मन में बसाया तो प्रसाद जी ने परम सत्ता को ब्रह्म संसार में खोजने की दृष्टि से।

 "न जाने कौन अरे द्धुतिमान

जान मुझको  अबोध अज्ञान"

 ५)नारी सम्मान की भावना:- छायावादी कवियों ने युग युग से उपेक्षित नारियों को साड़ियों की कार से मुक्त करने का प्रयास किया प्रसाद जी ने तो नारी को श्रद्धा की मूर्ति माना है।

:- नारी तुम केवल श्रद्धा हो विश्वास रजत नभ पग तल में।

 पीयूष स्रोत सी वहां करो जीवन के सुंदर समतल में।।

 ६)राष्ट्रीय जागरण:- छायावादी काव्य में राष्ट्रीय जागरण का शंखनाद सुनाई पड़ता है। राष्ट्रीय भावना के जागरण ने छायावाद के व्यक्तिवाद को असामाजिक पदों पर भटकने से बचा लिया।

: अरुण यह मधुमय देश हमारा  "-प्रसाद

2)  प्रगतिवादी कवि दिनकर की साहित्यिक विशेषताओं का वर्णन कीजिए।

Ans:-दिनकर की काव्यगत विशेषताएं दिनकर का भाव लोक अत्यंत विस्तृत और व्यापक है जिसमें जीवन के समस्त उदंत पक्ष समाहित है निस्संदे और राष्ट्रकवि कहलाने के अधिकारी है उनकी निम्नलिखित काव्यगत विशेषताएं इस प्रकार है:- 1)देशव्यापी राष्ट्रीयता और देश प्रेम की अभिव्यक्ति:- महाकवि दिनकर के काव्य में उत्कृष्ट राष्ट्रीयता और उज्जवल देश प्रेम के अभिव्यक्ति हुई है। उनके काव्य में देश के गौरवशाली अतीत का गण और राष्ट्रीय जागरण का स्वर उजागर किया गया है उनके अंधविश्वास और सामाजिक वीडियो में जकड़े भारत देश की दुर्दशा उनके पौरूष को ललकारती है और वह हुंकार कर उठते हैं:- 

फेकता हूं को तोड़ मरोड़ हरि निष्ठुर रे!बीन  के तार।

2) क्रांति और विद्रोह का स्वर :-दिनकर जी का हिंदी काव्य जगत में प्रवेश क्रांति और विद्रोह के तीव्र स्वर के साथ हुआ था उनकी कविताओं में क्रांति और विद्रोह का यह स्वर आरंभ से लेकर अंत तक है रूढ़ियों के प्रति विराट विद्रोह दिनकर की प्रत्येक पंक्ति में व्यक्त हुआ है वह सड़े गले समाज को क्रांति के द्वारा बदल डालना चाहते हैं इसलिए कहते हैं कि :-

पतन  पाप पाखंड जलें

 जग में ऐसी ज्वाला सुलगा दे।

3) शोषण के विरुद्ध आवाज:- पीड़ित मानवता और दलित समाज के प्रति गहरी सहानुभूति दिनकर जी के संपूर्ण काव्य में व्याप्त दिखाई देती है समझ में पहले शोषण का उन्होंने शहर में प्रतिवाद किया है मजदूर किसानों और सर्वहारा दलित वर्ग के प्रति उनकी करुणा की गंगा आवाज रूप से प्रभावित होती हुई दिखाई पड़ती है समझ में व्याप्त आर्थिक वैष्मय और शोषण को देखकर उनका पौरुष  दहाड़ उठता है।

" मलिक जब तेल फुलेलों पर पानी सा द्रव्य बनाते। हैं।

 पापी महलों का अहंकार ,तब देता मुझको आमंत्रण।"

3 ) हिंदी साहित्य में प्रगतिवाद की विशेषताओं का संक्षिप्त विवरण कीजिए।

4) प्रयोगवाद की सामान्य प्रवृत्तियों का उल्लेख कीजिए

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